सोने के हॉलमार्किंग शुल्क में 67 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी
14 सितंबर से सोने के प्रति आभूषण हॉलमार्किंग शुल्क 45 रुपये से बढ़कर 75 रुपये हो गया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 4:10 · 3 मिनट का पाठ
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टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग के लिए शुल्क में भारी बढ़ोतरी की गई है। इस निर्णय के तहत हॉलमार्किंग शुल्क में लगभग 67 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जिसका सीधा असर अब ग्राहकों और जौहरियों पर देखने को मिलेगा। नया शुल्क 14 सितंबर, 2026 से लागू हो गया है।
पहले सोने के प्रति आभूषण हॉलमार्किंग शुल्क 45 रुपये था, जिसे अब बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया गया है। इस प्रकार, जौहरियों को अब प्रत्येक सोने के आभूषण के लिए हॉलमार्किंग सेंटर पर 30 रुपये अधिक चुकाने होंगे। इसके अलावा, सोने की हॉलमार्किंग के लिए प्रति कंसाइनमेंट न्यूनतम शुल्क 200 रुपये निर्धारित किया गया है। इन बदलावों के कारण सोने के आभूषण बनाने की प्रक्रिया में लागत बढ़ेगी।
दूसरी ओर, एसेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर (AHC) के लिए भी नई दरें निर्धारित की गई हैं। AHC अब सोने के प्रत्येक आभूषण के लिए 7.50 रुपये चार्ज करेगा, जिसमें प्रति कंसाइनमेंट न्यूनतम शुल्क 20 रुपये रहेगा। हालांकि, चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। चांदी के लिए हॉलमार्किंग शुल्क पहले की तरह ही 35 रुपये प्रति नग रहेगा और न्यूनतम कंसाइनमेंट शुल्क 150 रुपये यथावत रखा गया है। चांदी के मामले में हॉलमार्किंग सेंटरों को BIS को प्रति नग 3.50 रुपये चुकाने होंगे, जिसमें न्यूनतम कंसाइनमेंट शुल्क 15 रुपये रहेगा।
सामान्य तौर पर जौहरी हॉलमार्किंग का यह खर्च अंतिम बिल में ग्राहकों से वसूलते हैं। हालांकि, हॉलमार्किंग शुल्क में 67 प्रतिशत की वृद्धि होने के बावजूद, ग्राहकों के कुल बिल में 67 प्रतिशत की वृद्धि नहीं होगी, क्योंकि यह केवल हॉलमार्किंग शुल्क का एक हिस्सा है। सोने की हॉलमार्किंग के ये नियम 9के, 14के, 18के, 20के, 22के, 23के और 24के शुद्धता वाले सभी आभूषणों पर लागू होते हैं।
1 जुलाई, 2021 से लागू हुई HUID प्रणाली के अनुसार, हॉलमार्क की गई प्रत्येक वस्तु पर BIS का लोगो, शुद्धता का ग्रेड और 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक HUID नंबर होना अनिवार्य है। इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य सोने की शुद्धता सुनिश्चित करना और ग्राहकों के साथ होने वाली धोखाधड़ी को रोकना है।
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) भारत की राष्ट्रीय मानक संस्था थी, जो उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत कार्यरत थी। इस संस्था का मुख्य कार्य भारत में वस्तुओं के मानकीकरण, हॉलमार्किंग और गुणवत्ता प्रमाणन प्रदान करना था। BIS द्वारा ही देश में हॉलमार्किंग के नियम बनाए जाते थे और उनका पालन सुनिश्चित किया जाता था। यह संस्था वर्षों से ग्राहकों के हित में गुणवत्ता के मानक तय करने के लिए जिम्मेदार रही थी।
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