नेशनल कॉन्फ्रेंस में आंतरिक कलह: 25 विधायकों की मांगों के साथ शुक्रवार को महत्वपूर्ण बैठक
पार्टी के असंतुष्ट विधायकों ने 10 सूत्री ज्ञापन तैयार किया, नेतृत्व के साथ आर-पार की लड़ाई के मूड में
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:17 · अपडेट शाम 4:01 · 4 मिनट का पाठ
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जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के लिए आगामी शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 का दिन अत्यंत निर्णायक साबित होने जा रहा है। पार्टी के आंतरिक सूत्रों और न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 17 से 25 नाराज विधायकों ने पार्टी के उच्च नेतृत्व के समक्ष अपनी मांगें रखने के लिए 10 बिंदुओं का एक ज्ञापन तैयार किया है। यह बैठक पार्टी की एकता बनाए रखने या विभाजन की ओर ले जाने के लिए 'मेक-ऑर-ब्रेक' जैसी होगी।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस राजनीतिक तूफान की शुरुआत 27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद हुई थी। इस घटनाक्रम के बाद 24 विधायकों का संगठित विरोध प्रदर्शन पार्टी हाईकमान के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। शुक्रवार को श्रीनगर में होने वाली इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उपस्थित रहने की संभावना है। हालांकि, दोनों नेता मिलकर बैठक की अध्यक्षता करेंगे या नहीं, इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि पार्टी में एकता का संदेश देने के लिए दोनों नेता एक साथ उपस्थित रह सकते हैं।
बैठक का स्थान फारूक अब्दुल्ला का गुपकर निवास या मुख्यमंत्री का निवास हो सकता है। असंतुष्ट विधायकों को पहले ही निर्देश दिए गए हैं कि वे शुक्रवार तक श्रीनगर न छोड़ें। पिछले दो सप्ताह से चल रही गुप्त वार्ताओं और आंतरिक खींचतान के बाद यह पहली बार होगा जब दोनों पक्ष आमने-सामने बैठकर चर्चा करेंगे। इससे पहले, मंगलवार शाम को गुलमर्ग के विधायक फारूक अहमद शाह के निवास पर 12 असंतुष्ट विधायकों की बैठक हुई थी, जो दो घंटे से अधिक समय तक चली थी। इस बैठक में शुक्रवार की रणनीति और ज्ञापन पर अंतिम निर्णय लिया गया था।
एक वरिष्ठ असंतुष्ट विधायक ने बताया, "हम सभी 12 विधायकों ने मिलकर मुद्दों पर चर्चा की है। अब हम हाईकमान के कॉल का इंतज़ार कर रहे हैं। हम किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। विधायकों की मांग है कि ज्ञापन में दर्शाई गई सभी बातों को लिखित रूप में लागू किया जाए और उसके साथ एक निश्चित समय-सीमा भी दी जाए। जब तक ये मांगें पूरी नहीं होंगी, वे पीछे नहीं हटेंगे।
दूसरी ओर, पार्टी नेतृत्व भी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय हो गया है। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और महासचिव अली मोहम्मद सागर द्वारा असंतुष्ट विधायकों से संपर्क साधने के प्रयास किए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले 48 घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं। यदि हाईकमान शुक्रवार की बैठक में कोई ठोस रोडमैप और समय-सीमा पेश करता है, तभी इस संकट का समाधान हो सकता है। अन्यथा, असंतुष्ट गुट संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर सकता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, जिसका लंबा इतिहास रहा है। शेख अब्दुल्ला द्वारा स्थापित इस पार्टी ने दशकों तक राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पार्टी के नेता पहले भी राज्य के मुख्यमंत्री पद पर रह चुके हैं और जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता के मुद्दे पर हमेशा आवाज़ उठाते रहे हैं। इस पार्टी ने अतीत में कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन वर्तमान विधायकों का यह विद्रोह पार्टी के लिए एक गंभीर चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
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