भारत 2047 तक सौर विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की ओर अग्रसर
इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार 32.3 लाख नई नौकरियों और 89 अरब डॉलर के निवेश की संभावना
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 6:27 · अपडेट सुबह 6:38 · 3 मिनट का पाठ
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भारत वर्ष 2047 तक सौर ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र में दुनिया का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) द्वारा जारी ‘विज़न 2047: सोलर मैन्युफैक्चरिंग फ्रॉम पॉलीसिलिकॉन टू पावर प्लांट’ नामक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में 32.3 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं और लगभग 89 अरब डॉलर के नए निवेश की संभावना है। इस विकास से भारत विदेशी आयात पर निर्भरता कम करके निर्यात में बड़ी वृद्धि कर सकेगा।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को केवल सोलर पैनल असेंबल करने तक सीमित न रहकर, इसके सभी मुख्य हिस्सों का उत्पादन देश में ही करना होगा। इन घटकों में पॉलीसिलिकॉन, इंगोट, वेफर, सोलर सेल और मॉड्यूल शामिल हैं। टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, अगले 10 वर्षों में भारत सौर उत्पादन के सभी महत्वपूर्ण हिस्सों में स्थानीय जरूरतों को पूरा करने की क्षमता हासिल कर लेगा।
क्षमता के संदर्भ में देखें तो, 2047 तक भारत की कुल स्थापित सौर बिजली उत्पादन क्षमता 2,275 गीगावाट तक पहुंच सकती है। इसके साथ ही सोलर मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 3,266 गीगावाट, सोलर सेल 2,796 गीगावाट, इंगोट-वेफर क्षमता 2,479 गीगावाट और पॉलीसिलिकॉन उत्पादन क्षमता 2,156 गीगावाट तक विस्तारित हो सकती है।
रोजगार के क्षेत्र में बड़ी उछाल आने की उम्मीद है। वर्तमान में इस क्षेत्र से जुड़ी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों की संख्या लगभग 4.1 लाख है, जो 2030 तक बढ़कर 8.1 लाख और 2047 तक 32.3 लाख तक पहुंच सकती है। प्लांट में सीधे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी वर्तमान 1.4 लाख से बढ़कर 11.1 लाख हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि लगभग 68 प्रतिशत प्रत्यक्ष नौकरियां सोलर सेल, वेफर और पॉलीसिलिकॉन जैसे उत्पादन के शुरुआती चरणों में ही सृजित होंगी।
स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए 2047 तक लगभग 89 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। इसके लिए 2027 से 2047 के दौरान हर साल औसतन 4.3 अरब डॉलर का निवेश करना होगा, जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पॉलीसिलिकॉन, वेफर और सेल के उत्पादन में उपयोग किया जाएगा। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत जून 2026 तक लगभग 8.4 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया जा चुका है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार के प्रत्येक 1 डॉलर के प्रोत्साहन के मुकाबले लगभग 4 डॉलर का निजी निवेश प्राप्त हुआ है।
वर्ष 2041 तक सौर घटकों का आयात शून्य हो सकता है, जबकि वर्तमान में भारत का वार्षिक सौर आयात बिल लगभग 4.4 अरब डॉलर है। 2047 तक दुनिया की कुल सोलर मॉड्यूल आपूर्ति में भारत की हिस्सेदारी 26.5 प्रतिशत हो सकती है, जो 2030 तक 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान था।
ISMA के महासचिव अमित मनोहर के अनुसार, इस लक्ष्य के लिए सरकार का निरंतर नीतिगत सहयोग, स्थिर मांग और शुरुआती चरणों में निवेश अनिवार्य है। रिपोर्ट में ALMM के नियमों को समय पर लागू करने, PLI प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने और रूफटॉप तथा कृषि सौर योजनाओं का दायरा बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा सौर मशीनरी के स्थानीय उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण और पुराने पैनलों के रिसाइक्लिंग के लिए ढांचा तैयार करने पर जोर दिया गया है। योजना के अनुसार, 2030 तक सोलर सेल और 2035 तक वेफर उत्पादन स्थापित किया जाएगा।
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