पंजाब चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच पोस्टर वॉर
राहुल गांधी के बयान के बाद दोनों दलों के बीच सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत हमले तेज हुए
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 7:56 · 5 मिनट का पाठ
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पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक संबंध अत्यंत तनावपूर्ण हो गए हैं। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों दलों के बीच यह तकरार अब केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यक्तिगत हमलों और 'पोस्टर वॉर' तक पहुंच गई है।
इस विवाद की शुरुआत 4 नवंबर को पंजाब के संगरूर में आयोजित कांग्रेस की एक रैली से हुई थी। इस रैली के दौरान राहुल गांधी ने पंजाब के मुख्यमंत्री और आप नेता भगवंत मान पर गंभीर आरोप लगाए थे। राहुल गांधी ने दावा किया कि जब भगवंत मान लोकसभा सांसद थे, तब सुबह 11 बजे तक भी उनके मुंह से शराब की गंध आती थी। राहुल गांधी ने आगे कहा कि यदि किसी राज्य में नशे के खिलाफ लड़ाई लड़नी है, तो उस राज्य के मुख्यमंत्री को स्वयं नशे से दूर रहना चाहिए।
इसके साथ ही राहुल गांधी ने पंजाब सरकार के संचालन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार दिल्ली से चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब की आधी कमान अमित शाह के हाथ में है और आधी अरविंद केजरीवाल के हाथ में है। राहुल गांधी के इन बयानों ने दोनों दलों के बीच राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया।
इन आरोपों के जवाब में आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राहुल गांधी के बयान को उनके कद के नेता के लिए 'छोटी बात' बताया। कांग्रेस पर प्रहार करते हुए भारद्वाज ने सवाल किया कि कांग्रेस की सबसे बड़ी लड़ाई भाजपा के खिलाफ है या विपक्षी दलों के खिलाफ?
इस मौखिक युद्ध के बाद दोनों दलों के बीच सोशल मीडिया पर हमले तेज हो गए। आम आदमी पार्टी ने राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए एक पोस्टर जारी किया, जिसमें उन पर व्यक्तिगत हमले किए गए थे। इसके जवाब में कांग्रेस नेता बीवी श्रीनिवास ने अरविंद केजरीवाल की एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें केजरीवाल पर व्यक्तिगत प्रहार किए गए थे। इस तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दोनों दलों के बीच पोस्टर वॉर शुरू हो गया।
दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पंजाब कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी भगवंत मान सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और दावा किया कि सरकार पंजाब के हितों की अनदेखी कर रही है।
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री के अनुसार, पंजाब का चुनाव इस वर्तमान टकराव का तात्कालिक कारण है, लेकिन दोनों दलों के बीच विरोध का इतिहास बहुत पुराना है। अत्री बताते हैं कि आम आदमी पार्टी ने अपने उदय से लेकर अब तक भाजपा पर हमले किए हैं, लेकिन उनका मुख्य लक्ष्य हमेशा कांग्रेस पार्टी रही है। उनके अनुसार, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस बुनियादी तौर पर दो अलग राजनीतिक ध्रुव हैं। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में वे साथ आने का प्रयास करते हैं, लेकिन उनके बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा हमेशा बनी रहती है। अत्री के मुताबिक, अब राष्ट्रीय राजनीति में भी दोनों के बीच निकटता की संभावना बहुत कम रह गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि आम आदमी पार्टी की वर्तमान राजनीतिक शक्ति मुख्य रूप से पंजाब तक सीमित है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के कुछ राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद संसद में भी आप की स्थिति कमजोर हुई है, जिसके कारण राष्ट्रीय राजनीति में उनकी भूमिका पहले जैसी नहीं रही है।
दोनों दलों के संबंधों में शुरुआत से ही विरोधाभास रहा है। एक तरफ वे भाजपा के खिलाफ विपक्षी राजनीति का हिस्सा होने का दावा करते हैं, तो दूसरी तरफ कई राज्यों में वे एक-दूसरे के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो, 2012 में अन्ना आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी की स्थापना की थी। इस आंदोलन का मुख्य लक्ष्य तत्कालीन कांग्रेस सरकार थी और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के जरिए इस पार्टी ने कांग्रेस की राजनीति को चुनौती दी थी। दिसंबर 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप को 28 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस केवल 8 सीटों पर सिमट गई थी। उस समय भाजपा सबसे बड़ी पार्टी थी लेकिन उसके पास बहुमत नहीं था, इसलिए कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को बाहर से समर्थन दिया और अरविंद केजरीवाल पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। हालांकि, जनलोकपाल विधेयक विधानसभा में पेश न हो पाने के कारण केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया और यह सरकार केवल 49 दिनों तक चली।
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