चुनाव आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव किए
बैठकों के एजेंडा और मिनट्स को सार्वजनिक करना तथा अधिकारियों की विदेश यात्रा के लिए पूर्व अनुमति लेना अब अनिवार्य होगा।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 11:41 · अपडेट सुबह 11:54 · 3 मिनट का पाठ
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भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने संस्थान के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव करने की घोषणा की है। इन नए बदलावों के तहत अब चुनाव आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले ही साझा किया जाएगा और बैठकों के दौरान हुई कार्यवाही का विवरण यानी मिनट्स भी सार्वजनिक किए जाएंगे। पहले इस तरह की प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता था। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य यह जानकारी उपलब्ध कराना है कि आयोग की बैठकों में किन मुद्दों पर चर्चा की गई और क्या निर्णय लिए गए।
इसके साथ ही, चुनाव आयोग में कार्यरत अधिकारियों के लिए विदेश यात्रा के नियमों में भी सख्ती लाई गई है। अब आयोग के अधिकारियों को विदेश यात्रा पर जाने के लिए चुनाव आयोग से पूर्व अनुमति लेनी होगी। पहले ऐसी अनुमति लेने की प्रक्रिया लागू नहीं थी। इसके अलावा, नए आईटी (IT) मॉड्यूल से संबंधित निर्णय अब सीधे आयोग के समक्ष नहीं रखे जाएंगे। नए आईटी मॉड्यूल को पहले अधिकारियों की एक समिति के पास भेजा जाएगा और उस समिति से मंजूरी मिलने के बाद ही इसे चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इससे पहले आईटी मॉड्यूल के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच विवाद भी हुआ था।
चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ऑनलाइन फॉर्म से अब घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) का विकल्प हटा दिया गया है। यह बदलाव उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया है जहाँ वर्तमान में SIR की प्रक्रिया चल रही है। अब यह घोषणा-पत्र ऑनलाइन फॉर्म का हिस्सा नहीं रहेगा, बल्कि इसके लिए अलग से घोषणा-पत्र जारी किया गया है। 4 नवंबर को जारी अपडेट के अनुसार, आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए मतदाताओं के लिए ऑनलाइन फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा-पत्र (एनेक्सचर-डी) की अनिवार्य आवश्यकता को अलग कर दिया है।
नए मतदाताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने और ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आने वाली अतिरिक्त कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से SIR के नियमों में यह बदलाव किया गया है। अब मतदाता पंजीकरण के ऑनलाइन फॉर्म में यह घोषणा-पत्र शामिल नहीं होगा, बल्कि इसके लिए अलग से घोषणा-पत्र देना होगा। ये सभी महत्वपूर्ण निर्णय 26 सितंबर को लिए गए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की उपस्थिति में आयोग की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में आंतरिक कामकाज को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने से जुड़े सभी निर्णयों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। इन बदलावों के संबंध में आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के दस्तावेजों में दी गई है।
चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए इन कदमों का मुख्य उद्देश्य संस्थान की आंतरिक कार्यप्रणाली में जवाबदेही बढ़ाना है। बैठकों के एजेंडा और मिनट्स को सार्वजनिक करने से आयोग की प्रक्रियाएं अधिक खुली होंगी। अधिकारियों की विदेश यात्रा के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य करने का निर्णय भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
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