अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध गुप्त सैन्य अभियान रोका
चुनाव के एक दिन पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू रच रहे थे बड़ा हमला करने की योजना
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, दोपहर 1:38 · 4 मिनट का पाठ
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कैपिटल क्रांति की रिपोर्ट के अनुसार, एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा ईरान के विरुद्ध रचे गए एक गुप्त सैन्य ऑपरेशन को अमेरिका द्वारा रोक दिया गया है। इजरायल में गत २७ अक्टूबर को आम चुनाव हुए थे। आज तक द्वारा प्रसारित रिपोर्ट में बताया गया है कि इजरायली टीवी मीडिया 'चैनल १२' की एक खोजी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चुनाव से ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान पर एक बड़ा हमला कराने वाले थे। परंतु अमेरिका ने समय पर हस्तक्षेप करके इस पूरी योजना पर पानी फेर दिया था और ऑपरेशन रोक दिया था।
इस गुप्त सैन्य ऑपरेशन की पूरी योजना प्रधानमंत्री नेतन्याहू और उनके वफादार मोसाद प्रमुख रोमन गोफमैन द्वारा तैयार की गई होने की बात रिपोर्ट में बताई गई है। हालांकि, एक तकनीकी खामी या गफलत के कारण अमेरिका को इस गुप्त योजना की जानकारी मिल गई थी। इसके पश्चात वाशिंगटन द्वारा तत्काल प्रभाव से कदम उठाए गए और इस अभियान को रद्द करवाया गया था। इजरायली नेटवर्क द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह तमाम जानकारियां सैन्य सेंसरशिप के कड़े नियमों के पालन के तहत ही प्रसारित की जा रही हैं।
इस गुप्त ऑपरेशन के सामने इजरायल के ही शीर्ष सुरक्षा प्रतिष्ठानों और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों का भारी विरोध था। सुरक्षा अधिकारियों में आशंका थी कि चुनाव की पूर्वसंध्या पर उठाया गया ऐसा कोई भी जोखिम भरा कदम ईरान के साथ एक भीषण युद्ध को बुलावा दे सकता है। इससे देश की आंतरिक स्थिति इस हद तक बिगड़ जाने की संभावना थी कि निर्धारित समय पर चुनाव कराना पूरी तरह असंभव हो जाता। सुरक्षा एजेंसियों का आंतरिक विरोध होने के बावजूद, पीएम नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख इस ऑपरेशन को आगे बढ़ाने के लिए अड़े रहे, किंतु इजरायली सुरक्षा ऑपरेटर की एक तकनीकी भूल के कारण अमेरिका को इसकी भनक लग गई।
दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इन तमाम दावों को सरसरी तौर पर खारिज कर दिया गया है। पीएमओ द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री द्वारा वास्तविक समय में ही यह बात बिल्कुल साफ कर दी गई थी कि इजरायली चुनावों से ठीक पहले किसी भी प्रकार के हमले को अंजाम देने का कोई एजेंडा कभी था ही नहीं।
यह नया खुलासा २७ अक्टूबर के मतदान से ठीक दो दिन पहले यानी २५ अक्टूबर के दिन 'चैनल १२' द्वारा किए गए अन्य खुलासे से जुड़ा हुआ है। उस समय ऐसी रिपोर्ट दी गई थी कि पीएम नेतन्याहू और इजरायल डिफेंस फोर्सेस (आईडीएफ) के चीफ ऑफ स्टाफ इयाल जमील के बीच सैन्य कार्रवाई के मुद्दे पर बड़ा टकराव चल रहा था। जमील लगातार उस सैन्य आदेश को लागू करने का विरोध कर रहे थे, जिसे लेकर सुरक्षा अधिकारियों का मानना था कि वह सीधे ईरान के साथ युद्ध में परिणत हो सकता है।
सैन्य सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया था कि इयाल जमील ने इस कार्रवाई पर आगे चर्चा करने के लिए और उसकी कानूनी मंजूरी प्राप्त करने के लिए नेतन्याहू से लिखित दस्तावेज की मांग की थी। पाल्माचिम एयरबेस पर आयोजित एक बैठक के दौरान इन दोनों के बीच का तनाव इतना बढ़ गया था कि कमरे का माहौल अत्यंत कड़वाहट से भर गया था। उस समय एक वरिष्ठ सुरक्षा सूत्र ने यह भी कहा था कि इतिहास कभी नहीं भूलेगा कि हाल के दिनों में जमील ने किस प्रकार की भूमिका निभाई है।
हालांकि, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पूर्व में इन तमाम रिपोर्टों को मात्र 'बकवास' करार दिया था और दावा किया था कि इयाल जमील के साथ उनकी कोई लड़ाई नहीं हुई थी।
बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री रहे हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा और विदेश नीति के मोर्चे पर कई बड़े निर्णय लिए हैं। उनके कार्यकाल के दौरान ईरान के साथ संबंध अत्यंत तनावपूर्ण रहे हैं और इजरायल की खुफिया एवं सैन्य कार्रवाइयां हमेशा वैश्विक स्तर पर चर्चा के केंद्र में रही हैं।
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