नवजात शिशुओं को विटामिन K का इंजेक्शन न देना जोखिम भरा, ब्लीडिंग का खतरा 47% बढ़ा
52 लाख से अधिक बच्चों पर हुए शोध में खुलासा, विटामिन K की कमी से मस्तिष्क में रक्तस्राव का जोखिम 2.4 गुना अधिक।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, रात 9:23 · 4 मिनट का पाठ
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नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को लेकर एक अत्यंत गंभीर और महत्वपूर्ण चिकित्सा शोध सामने आया है। 'आज तक' की रिपोर्ट के अनुसार, जन्म के बाद नवजात बच्चे को विटामिन K का इंजेक्शन न देना उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत जोखिम भरा साबित हो सकता है। हाल ही में किए गए एक विशाल शोध में यह स्पष्ट हुआ है कि जिन बच्चों को जन्म के समय यह इंजेक्शन नहीं दिया जाता है, उनमें जीवन के शुरुआती छह महीनों के दौरान ब्लीडिंग यानी अत्यधिक रक्तस्राव होने का जोखिम 47 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ये चौंकाने वाले निष्कर्ष प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'JAMA' में प्रकाशित किए गए हैं।
यह व्यापक शोध अमेरिका में किया गया था, जिसमें जनवरी 2017 से दिसंबर 2025 के बीच अमेरिका के 50 राज्यों के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य प्रणालियों में जन्मे कुल 52,40,780 बच्चों के मेडिकल रिकॉर्ड का गहराई से अध्ययन किया गया। शोधकर्ताओं ने इन लाखों बच्चों के डेटा का विश्लेषण कर यह देखने का प्रयास किया कि जन्म के समय विटामिन K का इंजेक्शन लेने वाले और न लेने वाले बच्चों में रक्तस्राव की समस्या कितनी बार देखी जाती है।
शोध के दौरान एक चिंताजनक रुझान भी सामने आया है। अमेरिका में जन्म के समय विटामिन K का इंजेक्शन न लेने वाले बच्चों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्ष 2017 में यह आंकड़ा 3.1 प्रतिशत था, जो 2025 तक बढ़कर 6.8 प्रतिशत पर पहुँच गया है। इस अवधि के दौरान जिन बच्चों को इंजेक्शन नहीं दिया गया था, उनमें ब्लीडिंग के मामलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
शोध के निष्कर्षों के अनुसार, विटामिन K न लेने वाले बच्चों में न केवल सामान्य रक्तस्राव का जोखिम है, बल्कि मस्तिष्क के अंदर रक्तस्राव यानी 'इंट्राक्रेनियल ब्लीडिंग' का जोखिम भी सामान्य बच्चों की तुलना में 2.4 गुना अधिक पाया गया है। इतना ही नहीं, जन्म के समय अस्पताल में भर्ती होने पर रक्तस्राव के कारण मृत्यु का जोखिम भी इंजेक्शन न लेने वाले बच्चों में काफी अधिक पाया गया। अक्सर जानकारी के अभाव में माता-पिता इस इंजेक्शन के लिए मना कर देते हैं, या कुछ छोटे अस्पतालों में यह टीका उपलब्ध नहीं होता है, जो नवजात शिशु के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
विटामिन K मानव शरीर में रक्त जमने की प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब शरीर में कहीं भी चोट लगती है या खून निकलता है, तो उसे रोकने के लिए रक्त के थक्के बनना आवश्यक है, जिसे क्लॉटिंग कहा जाता है। विटामिन K इस प्रक्रिया को सक्रिय करता है। नवजात बच्चों में जन्म के समय विटामिन K की मात्रा प्राकृतिक रूप से बहुत कम होती है। इसके अलावा, माँ के दूध में भी विटामिन K की मात्रा सीमित होती है। जन्म के शुरुआती दिनों में बच्चे की आंतों में ऐसे बैक्टीरिया नहीं होते जो विटामिन K बनाने में मदद कर सकें। इन सभी कारकों के कारण नवजात शिशुओं में विटामिन K की कमी से होने वाले रक्तस्राव का जोखिम सबसे अधिक रहता है।
विटामिन K वसा में घुलनशील विटामिन का एक प्रकार है, जो मुख्य रूप से रक्त जमने की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है। ऐतिहासिक रूप से, नवजात शिशुओं में विटामिन K की कमी के कारण होने वाले रक्तस्राव (VKDB) को रोकने के लिए दशकों से जन्म के समय इंजेक्शन देने की पद्धति को मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल के रूप में स्वीकार किया गया है। इस प्रोटोकॉल का मुख्य उद्देश्य शिशु के जीवन के पहले कुछ हफ्तों में होने वाले गंभीर और जानलेवा रक्तस्राव को रोकना है, क्योंकि इस अवधि में बच्चे का शरीर स्वयं पर्याप्त विटामिन K उत्पन्न करने में असमर्थ होता है।
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