माता की मृत्यु के बाद भारतीय इंजीनियर ने बनाया वन्यजीव चेतावनी सिस्टम
मुदस्सिर अली ने 'वाइल्डपिंग' नाम का प्लेटफॉर्म विकसित किया है जो खतरनाक जानवरों की मौजूदगी की जानकारी देगा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, रात 8:24 · 3 मिनट का पाठ
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कश्मीर में भालू के हमले में अपनी माता को खोने वाले 33 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर मुदस्सिर अली ने तकनीक के माध्यम से अन्य लोगों की जान बचाने के लिए एक अभिनव पहल की है। उन्होंने वन्यजीवों की उपस्थिति के बारे में लोगों को पहले से सूचित करने वाली एक ऑनलाइन अर्ली-वार्निंग सिस्टम विकसित की है, जिसका उद्देश्य आवासीय क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास देखे जाने वाले खतरनाक जानवरों के बारे में लोगों को सतर्क करना है।
मुदस्सिर अली ने इस सिस्टम के लिए 'वाइल्डपिंग' (Wildping) नाम की एक मुफ्त वेबसाइट बनाई है। इस प्लेटफॉर्म पर लोग हिमालयन ब्लैक बियर और तेंदुओं जैसे खतरनाक वन्यजीवों के दिखने पर उसकी जानकारी दे सकते हैं। जब भी किसी व्यक्ति द्वारा जानवर देखे जाने की रिपोर्ट की जाती है, तो यह प्लेटफॉर्म उस क्षेत्र के आसपास के अन्य उपयोगकर्ताओं को तत्काल अलर्ट भेजता है। इससे स्थानीय लोग सावधान रह सकते हैं और संभावित हमलों से बच सकते हैं।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, अली ने इस प्लेटफॉर्म को अक्टूबर महीने में लॉन्च किया था, जो उनकी माता की मृत्यु की पहली पुण्यतिथि थी। एएफपी (AFP) के साथ बातचीत में अली ने बताया कि माता की मृत्यु के बाद वे अपनी तकनीकी कुशलता का उपयोग ऐसी कोई चीज़ बनाने के लिए करना चाहते थे जो वन्यजीव हमलों से प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मदद कर सके। उन्होंने आगे कहा कि वे स्वयं वन्यजीव हमले में प्रियजन को खोने का दर्द सह चुके हैं, इसलिए वे नहीं चाहते कि अन्य परिवारों को भी ऐसा ही दर्द सहना पड़े।
हिमालय के पूरे क्षेत्र में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। जंगलों के विनाश और जानवरों के प्राकृतिक आवास घटने के कारण वन्यजीव मानव बस्तियों के और करीब आ रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप आमने-सामने मुठभेड़ की संभावनाएं बढ़ गई हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023 से इस क्षेत्र में वन्यजीवों के हमलों में कम से कम 50 लोगों की मौत हुई है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।
'वाइल्डपिंग' का मुख्य उद्देश्य लोगों को खतरनाक जानवरों से सामना होने से पहले चेतावनी देना है। इस सिस्टम में उपयोगकर्ता अपने घर, खेतों, स्कूलों और बच्चों के स्कूल जाने वाले रास्तों जैसे विशिष्ट स्थानों के आसपास 'अलर्ट ज़ोन' बना सकते हैं। यदि इन निर्धारित क्षेत्रों के पास कोई भालू या अन्य जानवर देखा जाता है और उसकी सूचना दी जाती है, तो संबंधित उपयोगकर्ताओं को उनके फोन पर तुरंत अलर्ट प्राप्त होगा।
वेबसाइट पर यह स्पष्ट किया गया है कि यह सिस्टम मानव-वन्यजीव संघर्ष को पूरी तरह से नहीं रोक सकता, लेकिन यह परिवारों को सावधानी बरतने के लिए कुछ अतिरिक्त मिनट प्रदान कर सकता है। यह थोड़ा समय बहुत महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इसके माध्यम से बच्चों को घर के अंदर रखना, किसी विशिष्ट रास्ते पर चलने से बचना या तत्काल मदद बुलाना संभव हो पाता है।
उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए 'वाइल्डपिंग' प्लेटफॉर्म अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू, इन तीन भाषाओं में उपलब्ध है। लॉन्च होने के बाद इस प्लेटफॉर्म को लोगों से बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
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