साबर डेयरी के पशु आहार की गुणवत्ता पर महिला पशुपालकों ने उठाए सवाल
खराब आहार के कारण पशुओं के बीमार पड़ने और दूध के कम भाव से महिलाओं में रोष
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 2:25 · 2 मिनट का पाठ
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साबरकांठा जिले में साबर डेयरी के चेयरमैन के चुनाव का माहौल इस समय काफी गरमाया हुआ है। इस दौरान इडर तालुका के जादर गांव का दौरा करने पर टीवी9 गुजराती की टीम ने पशुपालन से जुड़ी महिलाओं से बातचीत की, जिसमें डेयरी के प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जादर गांव की महिला पशुपालकों का दावा है कि साबर डेयरी द्वारा उपलब्ध कराया जाने वाला पशु आहार अत्यंत घटिया गुणवत्ता का है। महिलाओं ने बताया कि डेयरी की तरफ से मिलने वाले इस चारे का सेवन करने के बाद उनके पशु बार-बार बीमार पड़ रहे हैं। एक महिला ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि आहार की खराब गुणवत्ता को लेकर डेयरी प्रबंधन से कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
महिला पशुपालकों की दिनचर्या बहुत कठिन है। वे सुबह-सवेरे 4 बजे उठकर पशुओं की देखभाल करना शुरू करती हैं, जिसमें पशुओं के रहने की सफाई और उन्हें चारा खिलाने की प्रक्रिया शामिल होती है। इतनी मेहनत करने के बाद भी उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है।
महिलाओं ने शिकायत की है कि डेयरी में दूध के फैट और एसएनएफ (SNF) के मानक कम रखे जाते हैं, जिसके कारण उन्हें प्रति लीटर दूध के केवल 28 से 30 रुपये ही मिलते हैं। पशुपालकों की मांग है कि उन्हें प्रति लीटर 40 रुपये मिलने चाहिए। वर्तमान में मिलने वाले दूध के भाव पशुओं के चारे के खर्च और मजदूरी के खर्च को पूरा नहीं करते हैं।
आर्थिक रिटर्न बहुत कम होने के कारण कुछ महिलाएं अब यह सवाल उठा रही हैं कि क्या उन्हें पशु रखना जारी रखना चाहिए या नहीं। साबर डेयरी के वर्तमान प्रबंधन के प्रति महिलाओं ने भारी रोष व्यक्त किया। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि डेयरी प्रबंधन से 'बाबू बरदान' जैसे व्यक्तियों को हटा दिया जाए, तो डेयरी का भविष्य सुधर सकता है।
टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, पशुपालकों ने अब मांग की है कि पशु आहार की गुणवत्ता और पशुपालकों को दिए जाने वाले रिटर्न को लेकर एक स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
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