शराब का निरंतर सेवन लिवर को स्थायी नुकसान पहुँचाता है
कुछ हफ्तों में फैटी लिवर और आगे चलकर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 3:14 · अपडेट दोपहर 3:19 · 3 मिनट का पाठ
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शराब का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक साबित होता है, जिसमें शरीर के लिवर पर इसका सबसे अधिक और गंभीर प्रभाव देखा जाता है। लिवर शरीर के एक ऐसे महत्वपूर्ण अंग के रूप में कार्य करता है जो शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने और कई आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने में मदद करता है। जब कोई व्यक्ति निरंतर शराब का सेवन करता है, तो लिवर पर दबाव बढ़ने लगता है। एबीपी अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में इस नुकसान का प्रभाव आसानी से समझ नहीं आता है, लेकिन समय के साथ यह गंभीर बीमारी का कारण बन जाता है।
शराब पीने के शुरुआती कुछ ही हफ्तों या महीनों में लिवर पर इसका पहला प्रभाव दिख सकता है। निरंतर अधिक मात्रा में शराब पीने से लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जिसे चिकित्सा भाषा में 'अल्कोहोलिक फैटी लिवर' कहा जाता है। इस स्थिति में लिवर की कोशिकाओं में आवश्यकता से अधिक चर्बी जमा हो जाती है। इस चरण की खास बात यह है कि कई लोगों को कोई विशेष परेशानी महसूस नहीं होती है, लेकिन कुछ मामलों में थकान होना या पेट के ऊपरी हिस्से में बेचैनी महसूस होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
यदि व्यक्ति शराब पीना जारी रखता है, तो बीमारी आगे बढ़ती है और लिवर में सूजन आ जाती है। इस स्थिति को 'अल्कोहोलिक हेपेटाइटिस' के रूप में जाना जाता है। इस चरण में लक्षण अधिक स्पष्ट हो जाते हैं, जिसमें भूख कम लगना, शरीर में कमजोरी महसूस होना, पेट में दर्द होना और आंखों तथा त्वचा का पीला पड़ जाना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। लंबे समय तक शराब का सेवन जारी रहने से लिवर की कोशिकाओं को बार-बार नुकसान पहुँचता है, जिसके कारण लिवर पर निशान बनने लगते हैं और धीरे-धीरे सिरोसिस जैसी अत्यंत गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है।
लिवर की एक सकारात्मक बात यह है कि शुरुआती नुकसान के चरण में इसमें सुधार की क्षमता होती है। यदि फैटी लिवर की स्थिति में समय रहते शराब का सेवन पूरी तरह बंद कर दिया जाए, तो लिवर में जमा फैट कम हो सकता है और सुधार संभव है। इसी तरह, शुरुआती सूजन की स्थिति में भी उचित उपचार और शराब छोड़ने से लिवर की स्थिति सुधारी जा सकती है।
हालांकि, जब बीमारी सिरोसिस के चरण तक पहुँच जाती है, तो लिवर पर बने निशान पूरी तरह ठीक नहीं हो सकते। ऐसी गंभीर स्थिति में भी शराब छोड़ना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, ताकि लिवर को होने वाले आगे के नुकसान को कम किया जा सके और स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके। एबीपी अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, जो व्यक्ति नियमित रूप से शराब पीते हैं, उन्हें केवल लक्षणों के दिखने का इंतजार किए बिना डॉक्टर की सलाह लेकर लिवर की जांच करानी चाहिए।
लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो जहरीले तत्वों को दूर करने का काम करता है। शराब के कारण जब इसकी कार्यक्षमता घटती है, तो पूरे शरीर के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
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