रुख बदलकर सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार कार्ड के बजाय वोटर आईडी जोड़े जाने पर विवाद
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार के इस कदम को 'मत चोरी नहीं, बल्कि अधिकारों की चोरी' करार दिया।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:24 · अपडेट दोपहर 3:01 · 4 मिनट का पाठ
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दिल्ली से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, द हिंदू अखबार के हवाले से केंद्र सरकार के एक महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार यानी ६ नवंबर २०२६ को मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह द्वारा दिए गए बयान के बाद यह विवाद शुरू हुआ है, जिसमें बताया गया था कि अब सामाजिक कल्याण के कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए लाभार्थियों की पहचान करने के लिए आधार कार्ड की जगह वोटर आईडी यानी मतदाता पहचान पत्र का उपयोग किया जाएगा।
इस घोषणा को एक बड़ा प्रभुत्वशाली षड्यंत्र बताते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिंदी में एक पोस्ट के माध्यम से कहा कि यह केवल मत चोरी नहीं, बल्कि सीधे अधिकारों की चोरी है। उन्होंने इस षड्यंत्र को बहुत गहरा बताते हुए नागरिकों से इसे समझने के लिए समय देने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में लाखों नाम मतदाता सूची से कम किए जा रहे हैं और यदि यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो और भी अधिक नाम हटा दिए जाएंगे। कांग्रेस पार्टी ने भी इस एसआईआर प्रक्रिया को कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के साथ जोड़ा है और आशंका जताई है कि इससे कई वास्तविक लाभार्थी वंचित रह सकते हैं। दूसरी तरफ, सीपीएम (CPI(M)) द्वारा भी कल्याणकारी लाभ प्राप्त करने के लिए बायोमेट्रिक और वोटर आईडी लिंक करने के मंत्री के सुझाव पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
राहुल गांधी ने आगे आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा ऐसे लोगों के नामों को निशाना बनाया जा रहा है जो भारतीय जनता पार्टी से नाराज हैं। उनके अनुसार, मतदाता सूचियां निष्पक्ष चुनाव आयोग के हाथ में होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान समय में वे मोदी सरकार के कर्मचारी ज्ञानेश कुमार के हाथ में हैं। उन्होंने दावा किया था कि मत चोरी में भाजपा के साथ उनकी मिलीभगत को वे सबूत के साथ रंगे हाथों पकड़ चुके हैं। ऐसी तैयारियां चल रही हैं जिसके द्वारा ऐसी सूची तैयार हो जिसमें बहुमत हमेशा भाजपा का ही रहे और अब यही सूची यह तय करेगी कि नागरिकों को योजनाओं का लाभ मिलेगा या नहीं।
उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि जिस किसी भी नागरिक ने कल ऐसा तय किया हो कि भाजपा को सत्ता से हटाना चाहिए, उनके नामों को चुन-चुनकर सूची से रद्द कर दिया जाएगा। नाम रद्द हुआ यानी मत गया और मत गया यानी सीधे अधिकार चले गए। इस प्रकार की व्यवस्था से नागरिक हाइजेक हुई लोकतंत्र के अदृश्य नागरिक बन जाएंगे, जहां जनता सरकार को नहीं चुनती बल्कि सरकार अपने मनपसंद लोगों को चुनती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आज पंचायती राज की योजनाएं हैं, तो क्या कल राशन, पेंशन, मनरेगा (MGNREGA), आवास, छात्रवृत्ति और आरक्षण भी इसके दायरे में आ जाएंगे?
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह चुनाव जीतने की राजनीति नहीं है, बल्कि चुनाव चुराने की एक व्यवस्था है और सत्ता को पकड़े रखने का स्थायी ढांचा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदान करना हर नागरिक का अधिकार है, कोई शर्त नहीं। गरीब व्यक्ति का पेंशन उसके मतदाता कार्ड का गुलाम नहीं हो सकता। यह सिर्फ मत की चोरी नहीं है बल्कि सीधे हक और अधिकारों की चोरी है और इस स्थिति को सहन नहीं किया जाएगा। इससे पहले ५ नवंबर २०२६ को कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर प्रहार करते हुए कहा था कि 'मत चोरी' तो सिर्फ एक ट्रेलर है और पूरी फिल्म तो 'हक-हूकूक चोरी' यानी अधिकारों की चोरी है।
दूसरी तरफ, पंचायती राज मंत्रालय के मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने स्पष्ट किया था कि मंत्रालय की योजनाओं के तहत वित्तीय लाभ और कल्याणकारी भुगतान प्राप्त करने के लिए अब अनिवार्य बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) नंबर होना अनिवार्य होगा।
विकिपीडिया की पृष्ठभूमि की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अग्रणी नेता हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में जिम्मेदारी संभालते हैं।
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