त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में उछाल, रिटेल बाजार में ₹70 तक पहुंची
उत्पादन में गिरावट और त्योहारी मांग के कारण गृहणियों का बजट बिगड़ा
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 7:14 · अपडेट दोपहर 12:31 · 4 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
दिवाली के पवित्र त्योहार के आगमन से पहले आम जनता पर महंगाई की बड़ी मार पड़ी है। त्योहारों के मौसम में घरों और मिठाई की दुकानों में चीनी का उपयोग सबसे अधिक होता है, लेकिन ठीक इसी समय बाजार में चीनी की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया है। इस मूल्य वृद्धि के कारण विशेष रूप से मध्यम वर्गीय परिवारों और गृहणियों के मासिक बजट पर सीधा असर पड़ा है।
आगामी 8 नवंबर, 2026 को देशभर में दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। इस पर्व के मात्र 4 दिन पहले ही बाजार में चीनी की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। एबीपी अस्मिता की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक महीने की छोटी अवधि में ही चीनी की कीमतों में प्रति किलो ₹4 से अधिक की भारी वृद्धि हुई है। देश के कुछ रिटेल बाजारों में तो चीनी की कीमतें ₹70 प्रति किलो के आंकड़े तक पहुंच गई हैं।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो, पूरे देश में चीनी की औसत रिटेल कीमत बढ़कर ₹59.50 प्रति किलो हो गई है। जबकि देश के मुख्य थोक बाजारों में औसत कीमत ₹55.40 प्रति किलो के स्तर पर देखी जा रही है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और पकवानों की अत्यधिक मांग बढ़ी है, लेकिन बाजार में चीनी की आपूर्ति कम होने के कारण कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
यदि पिछले एक वर्ष के बाजार रुझानों की तुलना की जाए तो स्थिति और अधिक चिंताजनक नजर आती है। ठीक एक साल पहले देश के रिटेल बाजार में चीनी की औसत कीमत ₹46.50 प्रति किलो थी, जबकि थोक बाजार में यह ₹43.23 प्रति किलो की दर से बिक रही थी। इस प्रकार, पिछले 12 महीनों की अवधि में चीनी की कीमतों में लगभग ₹12 से ₹13 प्रति किलो की भारी वृद्धि हुई है।
देश के मेट्रो शहरों में भी चीनी की कीमतें आसमान छू रही हैं। 3 नवंबर, 2026 को दर्ज दरों के अनुसार, कोलकाता में चीनी सबसे महंगी है, जहां कीमत ₹65 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो एक साल पहले ₹50 थी। राजधानी दिल्ली में चीनी ₹64 प्रति किलो बिक रही है, जो पिछले वर्ष ₹46 थी। वित्तीय राजधानी मुंबई में भी कीमत बढ़कर ₹61 प्रति किलो हो गई है, जो पहले ₹45 थी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी के महंगा होने के पीछे स्थानीय और वैश्विक दोनों कारण जिम्मेदार हैं। चालू वर्ष में गन्ने की फसल को प्रतिकूल मौसम और विभिन्न रोगों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण गन्ने और चीनी का कुल उत्पादन पिछली सीजन की तुलना में काफी कम रहा है। स्थानीय बाजार में उत्पादन घटा है और दूसरी ओर त्योहारों के कारण मिठाई निर्माताओं की मांग में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे सप्लाई-चेन बाधित हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति अनुकूल नहीं है। दुनिया के कई उत्पादक देशों में चीनी की कम उपलब्धता के कारण वैश्विक बाजार में दबाव बना है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण मालवाहक परिवहन और व्यापार प्रभावित हुए हैं। इस स्थिति का लाभ उठाकर कुछ मुनाफाखोर व्यापारियों ने चीनी का अवैध भंडारण शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो गई है।
सरकार ने दावा किया है कि चीनी की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। बाजार में आपूर्ति बनी रहे इसके लिए व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा तय की गई थी और आवश्यकतानुसार आयात की अनुमति भी दी गई थी। इसके साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक और दैनिक कीमतों पर विशेष निगरानी रखी गई थी, लेकिन ये सभी प्रयास मूल्य वृद्धि के सामने नाकाफी साबित हुए हैं।
પંજાબમાં કર્મભૂમિ એક્સપ્રેસના ૪ ડબ્બાઓમાં ભીષણ આગ, મુસાફરોએ જીવ બચાવવા ટ્રેનમાંથી કૂદકો માર્યો
અમૃતસરથી ન્યૂ જલપાઈગુડી જઈ રહેલી ટ્રેનમાં પેન્ટ્રીથી આગ શરૂ થયાના અંદાજિત સમાચાર, ૮ ટ્રેનોના રૂટ ડાયવર્ટ કરાયા
ईसाई समुदाय पर हमलों के मुद्दे पर आरएसएस नेता के साथ बैठक आयोजित
बंगिया क्रिस्तीय परिसेबा के प्रतिनिधियों ने चर्च और प्रार्थना सभाओं पर हुए हमलों पर चिंता व्यक्त की
स्कूलों में शौचालय की सुविधा के अभाव का बेटियों की शिक्षा पर बुरा असर
स्वच्छ और निजी शौचालय न होने के कारण मासिक धर्म के दौरान लड़कियां स्कूल जाने से बचती हैं।