भारत की नेविगेशन क्षमता बढ़ाने के लिए NVS-०३ सैटेलाइट सफलतापूर्वक कार्यरत
NavIC सिस्टम को मजबूत करने के लिए पांच अगली पीढ़ी के सैटेलाइट श्रृंखला में तीसरा सैटेलाइट शामिल किया गया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 6:24 · 2 मिनट का पाठ
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भारत के क्षेत्रीय सैटेलाइट आधारित नेविगेशन के लिए अक्टूबर २०२६ के अंत में एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है। 'नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन' यानी NavIC सिस्टम में NVS-०३ सैटेलाइट के सफल समावेश के साथ यह तकनीक फिर से चर्चा के केंद्र में आ गई है। यह सैटेलाइट पांच अगली पीढ़ी के सैटेलाइट की श्रृंखला में तीसरा है, जिसका उद्देश्य NavIC को और अधिक मजबूत बनाना है। NavIC, इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) का कार्यात्मक नाम है।
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने बताया है कि NVS-०३ में लगा नेविगेशन पेलोड L1, L5 और S बैंड में कार्य करता है। यह सैटेलाइट भारत और उसकी सीमाओं से १५०० किमी दूर के क्षेत्र को कवर करने की क्षमता रखता है। इस सैटेलाइट में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के अलावा आयातित घड़ियाँ भी सुसज्जित की गई हैं।
NVS-०३ के सफल समावेश के साथ अब 'GPS बनाम NavIC' को लेकर चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं। भू-राजनीतिक तनाव के इस समय में भारत को अपनी नेविगेशन प्रणाली क्यों बनाए रखनी चाहिए और उसे मजबूत क्यों करना चाहिए, इस पर विवाद फिर से शुरू हो गए हैं। यह तकनीक देश की सैटेलाइट आधारित नेविगेशन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत की इन नेविगेशन क्षमताओं को बढ़ाने के लिए पांच सैटेलाइट की एक श्रृंखला तैयार की जा रही है, जिसमें NVS-०३ तीसरा महत्वपूर्ण चरण है।
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