UGC गाइडलाइन्स 2026 की होगी समीक्षा, जेपी नड्डा के साथ बैठक के बाद करणी सेना का दावा
सर्वण महापंचायत समिति और सरकार के बीच दूसरे चरण की बातचीत संपन्न
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 8:10 · 3 मिनट का पाठ
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UGC (यूजीसी) गाइडलाइन्स 2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच सर्वण महापंचायत समिति और सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच दूसरे चरण की महत्वपूर्ण बातचीत संपन्न हुई है। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के साथ इस मुलाकात के बाद क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने इस मुलाकात को सामूहिक संघर्ष और संवाद की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. राज शेखावत ने एक्स (X) पर पोस्ट कर बताया कि बैठक के दौरान सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी गाइडलाइन्स 2026 को उसके वर्तमान स्वरूप में लागू नहीं किया जाएगा। इन नियमों पर पुनर्विचार करने के लिए एक समीक्षा समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति सभी की समानता, संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करेगी।
डॉ. राज शेखावत ने आगे कहा कि सरकार ने यूजीसी के विषय पर सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाकर गंभीरता से काम करने का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि यह वही आश्वासन है जो सरकार ने 20 सितंबर को दिया था और उसके बाद 5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने इस सफलता को किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं, बल्कि न्याय, समानता और निष्पक्ष व्यवस्था के लिए आवाज उठाने वाले सभी देशवासियों की सफलता बताया।
अब करणी सेना की आगामी अपेक्षा आवश्यक सुधारों के लिए समिति का गठन, यूजीसी गाइडलाइन्स 2026 पर निष्पक्ष पुनर्विचार और सामान्य वर्ग को उसके संवैधानिक अधिकारों तथा न्याय सुनिश्चित कराने की है।
दूसरी ओर, यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया था कि वह विवादित यूजीसी नियमों की फिर से समीक्षा करेगी और इसके लिए एक समिति भी गठित की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि नियमों की समीक्षा के दौरान सभी वर्गों के छात्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी वर्ग का छात्र स्वयं को असंतुष्ट, असुरक्षित या डरा हुआ महसूस न करे।
इस मामले में मुख्य न्यायाधीश ने भी टिप्पणी की थी कि प्रत्येक छात्र के हितों का संरक्षण करना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नियम बनाते समय देश की युवा पीढ़ी के हितों और उनकी भावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
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