पादरा रिश्वत मामले में पूर्व पीआई वी.ए. चारण को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली
जांच में सहयोग करने और 17 नवंबर 2026 तक बयान दर्ज कराने की कड़ी शर्तों के साथ राहत मिली
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 9:55 · 3 मिनट का पाठ
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वडोदरा जिले के पादरा पुलिस स्टेशन में रिश्वत लेने के गंभीर आरोप में शामिल पूर्व पुलिस निरीक्षक (PI) वी.ए. चारण को गुजरात उच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम सशर्त जमानत दे दी गई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद पिछले 7 महीनों से गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार रहने के बाद अब उन्हें कानूनी राहत मिली है। हालांकि, अदालत ने यह जमानत देते समय कुछ कड़ी शर्तें भी लगाई हैं।
हाईकोर्ट ने पूर्व पीआई को 17 नवंबर 2026 तक की अंतरिम सशर्त जमानत दी है। अदालत के आदेश के अनुसार, चारण को निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपने आधिकारिक बयान दर्ज कराने होंगे। इसके अलावा, उन्हें रिश्वत के लेनदेन, कॉल डिटेल्स और केस डायरी से संबंधित सभी जांचों में एसीबी को पूर्ण सहयोग करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि वे जांच में किसी भी प्रकार का असहयोग करते हैं या जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो उनकी जमानत रद्द की जा सकती है।
यह पूरा मामला पादरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एक साधारण मारपीट की शिकायत से जुड़ा हुआ है। एसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन पीआई वी.ए. चारण ने इस साधारण विवाद के मामले में समझौता कराने और आरोपी पक्ष को परेशान न करने के बहाने एक गंभीर धमकी दी थी। उन्होंने पूरे मामले को 'लव जिहाद' के गंभीर मामले में बदलने की परोक्ष धमकी देकर पीड़ित पक्ष से रिश्वत की मांग की थी। शुरुआत में भारी रकम की मांग की गई थी, लेकिन अंततः ₹2 लाख की रिश्वत तय की गई थी।
जब शिकायतकर्ता ने इस संबंध में एसीबी से संपर्क किया, तो एजेंसी ने एक जाल बिछाया। रिश्वत की राशि स्वीकार करने के लिए पीआई की ओर से जो निजी मध्यस्थ आया था, उसका नाम साजिदअली है। साजिदअली को एसीबी द्वारा रंगे हाथों पकड़ा गया था। मध्यस्थ की गिरफ्तारी होते ही पकड़े जाने के डर से पूर्व पीआई वी.ए. चारण भूमिगत हो गए थे और लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर भाग रहे थे।
इस मामले में एसीबी द्वारा की गई जांच और मध्यस्थ की गिरफ्तारी के बाद अब हाईकोर्ट के इस निर्णय से चारण को कानूनी राहत मिली है, लेकिन जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। अदालत ने जांच एजेंसी को सभी सबूत और विवरण प्राप्त करने में सहयोग करने का आदेश दिया है ताकि रिश्वत के इस लेनदेन की पूरी जांच की जा सके।
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