मोबाइल पीएलआई योजना के तहत सरकार को ₹३.२५ लाख करोड़ टैक्स के रूप में मिले
१९,००० करोड़ के प्रोत्साहन के सामने २५,००० करोड़ सीधा टैक्स और ३ लाख करोड़ जीएसटी मिला
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
29 अक्टूबर 2026, रात 10:08 · 4 मिनट का पाठ
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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि भारत सरकार द्वारा मोबाइल उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत १९,००० करोड़ रुपये दिए जाने के बावजूद, मोबाइल उद्योग से कुल ३.२५ लाख करोड़ रुपये टैक्स के रूप में एकत्र किए गए हैं। ये आंकड़े इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में देश की मजबूत वृद्धि और रोजगार सृजन के परिणाम दर्शाते हैं, जिससे देश का आयात घटा है और निर्यात में वृद्धि हुई है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'एक्स' प्लेटफॉर्म पर ये आंकड़े साझा करके इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयासों पर प्रश्न उठाने वाले मीडिया के आलोचकों को जवाब दिया था। वैष्णव ने स्पष्ट किया था कि सरकार द्वारा योजना के तहत १९,००० करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया था, जिसके बदले में लाभार्थियों से २५,००० करोड़ रुपये सीधे टैक्स के रूप में और ३ लाख करोड़ रुपये वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में प्राप्त हुए हैं।
रोजगार के क्षेत्र में भी इस उद्योग ने बड़ी सफलता हासिल की है। वैष्णव ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन क्षेत्र में वर्तमान में २५ लाख लोग कार्यरत हैं, जिसमें केवल मोबाइल उत्पादन क्षेत्र में ही १२ लाख लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने आलोचकों को संबोधित करते हुए कहा था कि, "इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में २५ लाख लोग कार्यरत हैं; केवल मोबाइल उत्पादन में १२ लाख लोगों को रोजगार मिलता है। अधिक प्रयास करें!!"
यह बयान एक मीडिया ओपिनियन वीडियो के जवाब में आया था, जिसमें चीन जैसे देशों में मौजूद इकोसिस्टम से तुलना करते हुए भारत द्वारा सब्सिडी के जरिए इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रयासों की कमियां दर्शाई गई थीं। उस वीडियो में यह दावा किया गया था कि सब्सिडी के समर्थन से तैयार किए जाने वाले तैयार मोबाइल फोन के निर्यात से होने वाले लाभ की तुलना में उसके घटकों के आयात के लिए भारत को अधिक खर्च करना पड़ता है।
सरकार द्वारा मार्च महीने में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्तीय वर्ष २०२५ में २ लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का निर्यात किया था। मोबाइल फोन का आयात भी अब लगभग नगण्य हो गया है। वर्ष २०२४-२५ में आयात घरेलू मांग का मात्र ०.०२ प्रतिशत रहा था, जबकि १० साल पहले यह आंकड़ा ७५ प्रतिशत था। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में मोबाइल उत्पादन और निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उत्पादन के क्षेत्रों में हुआ परिवर्तन भी आश्चर्यजनक है। २०१४-१५ में इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का उत्पादन लगभग १.९ लाख करोड़ रुपये था, जो २०२४-२५ में छह गुनी वृद्धि के साथ लगभग ११.३ लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी अवधि के दौरान मोबाइल फोन का उत्पादन लगभग ०.१८ लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग ५.५ लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्यात भी १० साल पहले के ०.३८ लाख करोड़ रुपये से आठ गुना बढ़कर २०२४-२५ में लगभग ३.३ लाख करोड़ रुपये हो गया है।
सरकार ने अब उत्पादन को और गति देने के लिए मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) शुरू की है। इस योजना के तहत उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुल ६२,५०० करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना वित्तीय वर्ष २०२६-२७ से वित्तीय वर्ष २०३०-३१ तक चलेगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्रोतों को बढ़ाना और भारतीय मोबाइल ब्रांडों को बढ़ावा देकर वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करना है।
इस नई योजना के तहत स्वदेशी रूप से डिजाइन और उत्पादित किए जाने वाले भारतीय स्मार्टफोन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अक्टूबर २०२८ तक की समय सीमा तय की है।
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