कमजोर मानसून के कारण रबी फसल और गेहूं की बुवाई में बड़ी गिरावट
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के डेटा के अनुसार रबी फसल के तहत क्षेत्र 46 प्रतिशत घटा है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
3 नवंबर 2026, सुबह 10:58 · अपडेट शाम 5:29 · 4 मिनट का पाठ
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कमजोर मानसून के कारण देश में रबी फसल की बुवाई की गति धीमी पड़ गई है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी किए गए डेटा के अनुसार, 30 अक्टूबर तक रबी फसल के तहत कुल क्षेत्र 37.56 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान 69.02 लाख हेक्टेयर था। इस तरह बुवाई के क्षेत्र में 46 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
मुख्य रबी फसल माने जाने वाले गेहूं की स्थिति चिंताजनक है। पिछले वर्ष इस अवधि के दौरान 3.34 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई थी, जो इस वर्ष घटकर मात्र 19,000 हेक्टेयर रह गई है। जमीन में पर्याप्त नमी के अभाव के कारण गेहूं की बुवाई में इतनी बड़ी गिरावट आई है। सामान्य तौर पर गेहूं की बुवाई अक्टूबर-नवंबर के दौरान की जाती है और इसकी कटाई मार्च-अप्रैल में होती है। वर्ष 2025-26 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) के दौरान गेहूं की बुवाई 336 लाख हेक्टेयर में की गई थी।
अन्य फसलों के आंकड़े भी गिरावट दर्शाते हैं। साप्ताहिक डेटा के अनुसार, दलहन के तहत क्षेत्र 19.56 लाख हेक्टेयर से घटकर 9.45 लाख हेक्टेयर हो गया है, जिसमें चना के क्षेत्र में 14.35 लाख हेक्टेयर से 5.90 लाख हेक्टेयर तक की गिरावट देखने को मिली है। इसी तरह, तिलहन के तहत क्षेत्र 38.62 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 20.97 लाख हेक्टेयर रहा है, जिसमें राई और सरसों का क्षेत्र 38.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 20.50 लाख हेक्टेयर हो गया है। मोटे अनाज (Coarse cereals) 3.78 लाख हेक्टेयर में बोए गए हैं जो पिछले वर्ष के 4.22 लाख हेक्टेयर से थोड़े कम हैं, जबकि शीतकालीन धान 3.16 लाख हेक्टेयर में बोया गया है जो पिछले वर्ष के 3.29 लाख हेक्टेयर से कम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जून से सितंबर के दौरान 13 प्रतिशत मानसून की कमी के कारण जमीन में मौजूद नमी कम हो गई है, जो बुवाई में देरी का मुख्य कारण है। इसके अलावा, सिंचाई की उपलब्धता में कमी और मुख्य गेहूं उत्पादक राज्यों में जलाशयों तथा नहर के पानी का स्तर सामान्य से नीचे होना भी एक कारण है, क्योंकि गेहूं के लिए बुवाई के बाद कई बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।
सोमवार को समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीफ फसल की कटाई के तुरंत बाद रबी बुवाई तेज की जाए ताकि उपलब्ध नमी का अधिकतम उपयोग हो सके। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सिंचाई का पानी सीमित है वहां किसानों को चना, सरसों, मसूर और बाजरा जैसी कम पानी और कम लागत वाली फसलें लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। चौहान ने तापमान के बदलावों को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित जलवायु-अनुकूल और गर्मी सहन कर सकने वाले बीजों को किसानों को उपलब्ध कराने को कहा।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि रबी सीजन के लिए यूरिया, DAP, MOP और NPK के साथ-साथ प्रमाणित बीजों की आपूर्ति पर्याप्त है और जिला स्तर तक सप्लाई चेन का समन्वय किया जा रहा है। मंडियों के रुझानों के विश्लेषण के अनुसार धान, गेहूं, मक्का, चना, मसूर, उड़द, सोयाबीन और सरसों जैसी मुख्य फसलों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ऊंचे हैं, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है।
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