रूसी विदेश मंत्री का फर्जी वीडियो शेयर करने पर प्रशांत भूषण के खिलाफ पुलिस शिकायत
सोशल मीडिया पर भ्रामक और उकसावे वाले वीडियो फैलाने के आरोप में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 1:38 · 4 मिनट का पाठ
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दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ एक गंभीर अपराध दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। यह मामला रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का एक कथित तौर पर डिजिटली मैनिपुलेटेड यानी छेड़छाड़ किया हुआ वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करने से जुड़ा हुआ है। हिंदुस्तान टाइम्स और द हिंदू की रिपोर्टों के अनुसार, इस वीडियो में रूसी विदेश मंत्री को भारत के आंतरिक मामलों और भारत द्वारा रूस से की जाने वाली तेल की खरीद को लेकर भारत विरोधी टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने इस मामले में एफआईआर नंबर २६३/२६ के तहत अपराध दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, इस पूरी घटना का खुलासा ३ नवंबर, २०२६ को साइबर पेट्रोलिंग के दौरान हुआ था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर @thequotesnews नामक हैंडल द्वारा यह दावा किया गया था कि प्रशांत भूषण के आधिकारिक हैंडल @pbhushan1 से रूसी विदेश मंत्री का एक फर्जी वीडियो शेयर किया गया है। इस वीडियो में लावरोव को भारत की आलोचना करते हुए दिखाकर इसे भारत सरकार के लिए एक 'जोरदार तमाचा' बताया गया था। पुलिस का कहना है कि इस वीडियो में जो सामग्री थी वह भ्रामक, मानहानिजनक और उकसावे वाली थी, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करना और अफवाहें फैलाना हो सकता है।
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की है। इनमें धारा ३३६(४) जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से संबंधित है, धारा ३५३(१)(सी) जो गलत जानकारी फैलाकर एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ उकसाने के लिए दंडनीय है, धारा ३५६ जो मानहानि से संबंधित है और धारा ३४०(२) जो फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का धोखाधड़ी से उपयोग करने पर लागू होती है, शामिल हैं। इसके अलावा, आईटी एक्ट की धारा ६६सी के तहत भी मामला दर्ज किया गया है, जो पहचान की चोरी और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या पासवर्ड के दुरुपयोग से जुड़ी है।
विदेश मंत्रालय (MEA) और रूसी दूतावास ने भी इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी करार दिया है। विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक यूनिट ने स्पष्ट किया है कि इस वीडियो के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की गई है और इसमें जो ऑडियो तथा कैप्शन रखे गए हैं वे बिल्कुल काल्पनिक हैं। रूसी दूतावास ने भी आधिकारिक तौर पर इन बयानों को खारिज कर दिया है और पुष्टि की है कि लावरोव के नाम पर जो वीडियो फैलाया जा रहा है वह फेब्रिकेटेड है। पुलिस अब इस वीडियो के मूल स्रोत और इसे सोशल मीडिया पर कैसे फैलाया गया, इसकी गहराई से जांच कर रही है।
इस घटना के साथ ही विदेश मंत्रालय ने एक अन्य फर्जी पोस्ट का भी पर्दाफाश किया है, जो विदेश मंत्री एस. जयशंकर के नाम पर फैलाई गई थी। इस पोस्ट में दावा किया गया था कि जयशंकर रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर रूसी मंत्री की 'व्यंग्यात्मक' प्रतिक्रिया से निराश हैं। वास्तव में, यह वीडियो ३०-३१ अक्टूबर को अटलांटा में आयोजित जी-२० विदेश मंत्रियों की बैठक का था, जिसमें जयशंकर ने युद्ध से होने वाले आर्थिक नुकसान और तबाही के बारे में बात की थी। मूल वीडियो में जयशंकर ने स्पष्ट किया था कि भारत ने रूस, कीव और यूरोपीय देशों के साथ नागरिक शिपिंग और अनाज के निर्यात को फिर से शुरू करने के संबंध में चर्चा की थी। उन्होंने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी इस मुद्दे पर बातचीत करने की बात कही थी। लेकिन सोशल मीडिया पर इस बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था।
प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट के एक जाने-माने वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे पहले भी कई जनहित याचिकाओं और कानूनी लड़ाइयों के लिए चर्चा में रहे हैं। वे 'स्वराज अभियान' और 'कैंपेन फॉर जुडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स' जैसी संस्थाओं से जुड़े रहे हैं। भूतकाल में उन्होंने न्यायपालिका और भ्रष्टाचार विरोधी कई मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई है, जिसकी वजह से वे अक्सर विवादों में भी रहे हैं। फिलहाल, इस एफआईआर के बाद पुलिस जांच का दायरा तेज हो गया है और सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।
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