दिल्ली में 600 करोड़ के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से 20 लाख लोगों को मिलेगी राहत
चंद्रावल में तैयार हुए इस प्लांट से सदर बाजार और लाल किले सहित कई इलाकों में पानी की समस्या हल होगी।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 1:54 · 4 मिनट का पाठ
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दिल्ली के चंद्रावल इलाके में 600 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किया गया है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से राजधानी के 20 लाख लोगों को सीधा फायदा होगा। इस प्लांट के निर्माण से लाल किला, सदर बाजार, करोल बाग और बल्लीमारन जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में वर्षों से चली आ रही पानी की किल्लत दूर होने की उम्मीद जगी है। इसके अलावा, यह प्लांट दिल्ली में चल रहे यमुना सफाई अभियान को भी और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दूसरी ओर, यमुना नदी के प्रदूषण की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में कालिंदी कुंज के पास यमुना के पानी में एक बार फिर सफेद झाग देखा गया था। इस समस्या के समाधान के लिए अब एक स्वीडिश कंपनी ने दिल्ली सरकार से संपर्क किया है। यह कंपनी सीवेज स्लज मैनेजमेंट में विशेषज्ञ है। दिल्ली के जल मंत्री और दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष परवेश वर्मा के साथ इस कंपनी के प्रतिनिधियों की दिल्ली सचिवालय में बैठक आयोजित हुई थी। हालांकि, फिलहाल ये चर्चाएं प्राथमिक चरण में हैं और दोनों पक्ष सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
यमुना नदी में प्रदूषण का स्तर कितना गंभीर है, इस बारे में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा पिछले महीने एक अध्ययन प्रस्तुत किया गया था। इस अध्ययन में 12 नालों को प्रदूषण के मुख्य हॉटस्पॉट के रूप में पहचाना गया है। 32 स्थानों पर कचरा फेंके जाने की बात सामने आई थी, जबकि 11 नालों पर गंदे पानी को नदी में जाने से रोकने की व्यवस्था या तो अपर्याप्त थी या ठीक से काम नहीं कर रही थी। नदी जब दिल्ली में प्रवेश करती है तो पल्ला के पास उसका पानी स्नान करने योग्य होता है, लेकिन जैसे ही यह ISBT ब्रिज तक पहुंचती है, तब बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) की मात्रा 30 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच जाती है, जो निर्धारित सीमा से 10 गुना अधिक है।
दिल्ली सरकार इस प्रदूषण को कम करने के लिए वैश्विक तकनीक का उपयोग करना चाहती है। जल मंत्री परवेश वर्मा ने कहा कि यमुना को स्वच्छ करने के लिए सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध तकनीक और वैश्विक विशेषज्ञता की आवश्यकता है। सरकार का उद्देश्य केवल नदी को स्वच्छ करना ही नहीं है, बल्कि राजधानी की समग्र जल और सीवेज प्रबंधन प्रणाली में सुधार करना भी है। इससे पहले जनवरी महीने में दिल्ली सरकार ने नजफगढ़ ड्रेन में फिनलैंड में बनी 'वाटरमास्टर' मशीन का उपयोग शुरू किया था, जो गाद और कचरा हटाने में मदद करती है। यह ड्रेन यमुना में गिरने वाले कुल प्रदूषण का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रखती है। इसके अलावा, जापान भी दिल्ली को पानी की समस्याओं को हल करने में मदद कर रहा है।
दिल्ली जल बोर्ड दिल्ली सरकार की एक स्वायत्त संस्था है, जो राजधानी में जल आपूर्ति और सीवेज प्रबंधन के लिए जिम्मेदार थी। इस संस्था का मुख्य कार्य दिल्ली के नागरिकों को पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध कराना और गंदे पानी के निपटान की व्यवस्था करना रहा है। वर्षों से यह संस्था दिल्ली के बढ़ते शहरीकरण और पानी की मांग को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जिसमें यमुना नदी के शुद्धिकरण के प्रयास भी शामिल रहे हैं।
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