धारी में तेंदुए ने खेत मजदूर परिवार की बच्ची पर हमला किया
देवला गांव की सीमा पर हुए इस हमले में बच्ची के गले और छाती पर पंजों के निशान आए हैं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 12:38 · 4 मिनट का पाठ
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गुजरात के अमरेली जिले के धारी क्षेत्र में एक तेंदुए ने खेत मजदूर परिवार की एक छोटी बच्ची पर हमला किया है। यह घटना धारी तालुका के देवला गांव की सीमा में स्थित एक वाड़ी के पास हुई। इस हमले के कारण क्षेत्र के खेतों के आसपास रहने वाले लोगों और विशेष रूप से खेतिहर मजदूरों में भारी चिंता और दहशत फैल गई है।
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, घटना के समय मजदूर परिवार की यह बच्ची खेत में मौजूद थी। बच्ची के पिता निजामभाई राठौड़ ने बताया कि कुछ बच्चे मोबाइल देने के लिए वाड़ी की ओर जा रहे थे। उस समय मोबाइल चालू था और अचानक तेंदुआ वहां पहुंच गया। तेंदुए ने मौका पाकर बच्ची पर हमला कर दिया। तेंदुए ने बच्ची के गले और छाती के हिस्से पर अपने पंजों से हमला किया, जिससे उसके शरीर पर पंजों के गहरे निशान पड़ गए। कुछ देर बाद तेंदुआ बच्ची को छोड़कर वहां से भाग निकला।
हमले की घटना होते ही वहां मौजूद लोगों में भारी अफरा-तफरी मच गई। परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों ने तुरंत बच्ची को संभाला और उसे उपचार के लिए धारी के सरकारी अस्पताल ले गए। अस्पताल की डॉ. संजना ने जानकारी दी कि 5 नवंबर को इस बच्ची को तेंदुए के हमले में घायल होने के बाद अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों ने बच्ची के शरीर पर हुए घावों की जांच की और प्राथमिक उपचार प्रदान किया। डॉक्टर ने बताया कि बच्ची को लगी चोटें गंभीर नहीं थीं और उपचार के दौरान उसकी स्थिति स्थिर थी। धारी के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार देने के बाद, बच्ची को आगे के इलाज के लिए अमरेली रेफर कर दिया गया।
धारी क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह में मनुष्यों पर तेंदुए के हमले की यह दूसरी घटना है। इससे पहले नागधरा गांव की सीमा में एक 7 साल के बच्चे पर तेंदुए ने हमला किया था। एक ही सप्ताह में दो बच्चों पर हुए इन हमलों ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। विशेष रूप से वे मजदूर परिवार अधिक चिंतित हैं जो अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर खेतों और वाड़ियों में काम करने जाते हैं।
वर्तमान समय में कपास और तिलहन की फसल की चुनाई का काम चल रहा है, जिसके कारण मजदूरों को खेतों में लंबा समय बिताना पड़ता है। कई मामलों में मजदूर अपने बच्चों को भी साथ रखते हैं, जिसके कारण बच्चे तेंदुए जैसे जंगली जानवरों के जोखिम में रहते हैं। लगातार बढ़ते हमलों के कारण ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति रोष देखा जा रहा है और वे सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और मॉनिटरिंग बढ़ानी चाहिए। लोगों ने मांग की है कि तेंदुए को पकड़ने के लिए तत्काल प्रभाव से पिंजरे लगाए जाएं और तेंदुए की आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस घटना ने खेतों में काम करने वाले श्रमिकों के सामने उनके बच्चों की सुरक्षा का बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का आग्रह है कि वन विभाग इस मामले को गंभीरता से ले और त्वरित कार्रवाई करे, क्योंकि तेंदुए की मौजूदगी अब उनके दैनिक जीवन और कामकाज के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है।
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