भारतीय नौसेना के लिए ₹४०,००० करोड़ के आठ नए युद्ध जहाजों के प्रोजेक्ट को मंजूरी
कैबिनेट समिति ने अगली पीढ़ी के कोर्वेट्स बनाने के लिए मंजूरी दी, ७०% से अधिक सामग्री भारत में बनेगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
30 अक्टूबर 2026, दोपहर 1:54 · 3 मिनट का पाठ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने भारतीय नौसेना के लिए आठ नई पीढ़ी के कोर्वेट्स (Next-Generation Corvettes) युद्ध जहाज बनाने के ₹४०,००० करोड़ से अधिक के विशाल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। The Economic Times के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत निर्मित किए जाने वाले युद्ध जहाज स्वदेशी स्टील्थ डिजाइन वाले होंगे, जो भारत की समुद्री सुरक्षा और स्थानीय रक्षा उत्पादन क्षमताओं को मजबूत बनाएंगे।
इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के तहत निर्मित किए जाने वाले आठों युद्ध जहाजों का निर्माण सरकारी क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों द्वारा किया जाएगा। जिसमें कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) शामिल हैं। दैनिक भास्कर के अनुसार, इन दोनों कंपनियों के साथ अगले कुछ दिनों में निर्माण के लिए अनुबंध किए जाने की संभावना है।
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन युद्ध जहाजों में ७०% से अधिक सामग्री भारत में ही बनाई जाएगी। इस बात से देश में रक्षा उत्पादन को गति मिलेगी और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को और मजबूती मिलेगी। इस प्रोजेक्ट द्वारा सरकार के 'सागर विजन' (SAGAR vision) को भी समर्थन मिलेगा। रक्षा सूत्रों के अनुसार, हाल के समय में सरकार के उच्च स्तर पर मंजूरी प्राप्त करने वाली यह पहली बड़ी रक्षा योजना है।
नए युद्ध जहाजों के निर्माण से संबंधित समयरेखा के बारे में जानकारी देते हुए रिपोर्ट बताती हैं कि, पहले जहाज का निर्माण एक वर्ष के भीतर शुरू होने की उम्मीद है। इन आठों युद्ध जहाजों का निर्माण भारत की धरती पर ही किया जाएगा। The Economic Times के अनुसार, पहला जहाज २०३० तक नौसेना को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। दैनिक भास्कर के रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण की समयसीमा घटाने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं और अगले ४ से ५ वर्षों में इन युद्ध जहाजों की डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है।
भारतीय नौसेना वर्तमान में हिंद महासागर में बढ़ते सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसके कारण वह अपने बेड़े को आधुनिक बना रही है। विशेष रूप से इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए नौसेना अपनी ताकत बढ़ा रही है। यह प्रोजेक्ट नौसेना की शक्ति में वृद्धि करेगा और देश में युद्ध जहाज बनाने की प्रक्रिया को प्रोत्साहन देगा।
नौसेना की अन्य युद्ध जहाज निर्माण योजनाओं में नीलगिरी क्लास फ्रिगेट, नए डिस्ट्रॉयर और फ्लीट सपोर्ट शिप भी शामिल हैं। ये सभी योजनाएं मिलकर भारत की समुद्री सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगी। इस विशाल प्रोजेक्ट द्वारा भारत की रक्षा क्षमता में बड़ा उछाल आने की संभावना है, जो देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में निर्णायक साबित होगा।
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