आर. जी. कर मामला: सीबीआई की जांच के सामने माता ने व्यक्त की नाराजगी
जांच एजेंसी कोई प्रगति करने में असफल रही होने का और भ्रष्टाचार कम हुआ नहीं होने का परिवार का आक्षेप
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
2 नवंबर 2026, शाम 5:10 · 3 मिनट का पाठ
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आर. जी. कर अस्पताल के दुष्कर्म और हत्या मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) द्वारा की जा रही जांच की प्रगति के सामने पीड़ित युवती की माता ने भारी असंतोष व्यक्त किया है। एनडीटीवी के रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सवाल उठाते हुए पीड़िता की माता ने बताया था कि उनके परिवार ने कभी केंद्रीय जांच की मांगणी की नहीं थी और एजेंसी कोई भी प्रकार की प्रगति लाने में असफल रही है। उन्होंने आगे स्पष्ट शब्दों में बताया था कि यदि केंद्रीय एजेंसी अपना काम बराबर कर सकती न हो, तो उसे जांच छोड़कर बाजू पर खिसक जाना चाहिए। पीड़ित अस्पताल के माता-पिता पहले भी अनेक बार इस जांच के सामने नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं और उनका मानना है कि इस गुनाह में संलिप्त होने का वे जिसे मानते हैं उन्हें अभी तक न्याय के कठघरे में लाया गया नहीं है। पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में सुओमोटो संज्ञान लेने के बाद केस की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश किया था।
इस मामले में अधिक विवरण देते हुए रत्ना देबनाथ ने बताया था कि पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद भी मेडिकल कॉलेजों में भ्रष्टाचार का प्रमाण घटा नहीं है। रत्ना देबनाथ भाजपा के विधायक हैं और रत्ना देबनाथ खुद आर. जी. कर अस्पताल की पीड़ित युवती की माता हैं। रविवार को पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने दावा किया था कि सरकार में सत्तापलट हुआ होने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार हुआ नहीं है और अभी भी वही पुराने लोग आसपास हाजिर हैं, जिसके कारण भ्रष्टाचार में कोई घटाटा नोट हुआ नहीं है।
इसी के साथ पनिहाटी विधानसभा सीट से विधायक बने देबनाथ ने ऐसा भी संकेत दिया था कि वे न्याय प्राप्त करने के लिए और मेडिकल कॉलेजों में कथित भ्रष्टाचार के किस्सों में कड़ी कार्रवाई की मांगणी करने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का संपर्क करेंगे। उन्होंने दावा किया था कि उनके पास अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में चल रहे कथित भ्रष्टाचार संबंधित बहुत सारी फाइलें आई हैं और वे चाहते हैं कि यह सभी गंभीर आरोपों की योग्य जांच की जाए। यह सभी बातों के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया था कि वे यह मामला मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
उल्लेखीनीय है कि रत्ना देबनाथ ने पहले भाजपा में जुड़ते समय ऐसा कारण दिया था कि यदि राज्य में सत्ता परिवर्तन होगा नहीं तो उनकी बेटी के लिए न्याय प्राप्त करने का काम बहुत ही मुश्किल साबित होगा। यह मान्यता के आधार पर उन्होंने पक्ष बदला था और उसके बाद वर्ष २०२६ की चुनाव में पनिहाटी विधानसभा सीट पर से विजय प्राप्त किया था। हालांकि, वर्तमान में केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली धीमी होने का बताकर और भ्रष्टाचार के सामने आवाज उठाकर उन्होंने पूरे राज्य में राजनीतिक गरमावा बढ़ा दिया है।
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