भारत के शहरी उपभोक्ताओं की खरीदारी की आवृत्ति घटी लेकिन FMCG पर खर्च बढ़ा
बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता कम बार खरीदारी करने जाते हैं लेकिन अधिक राशि खर्च करते हैं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
3 नवंबर 2026, सुबह 9:38 · अपडेट सुबह 10:12 · 3 मिनट का पाठ
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The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शहरी उपभोक्ताओं की खरीदारी की पद्धति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ता अब FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) वस्तुओं पर 13% अधिक खर्च कर रहे हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वे खरीदारी करने के लिए बाजार या दुकानों पर कम बार जाते हैं। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण वस्तुओं की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं।
रिपोर्ट बताती है कि उपभोक्ता अब खरीदारी के लिए पहले की तुलना में कम यात्राएं (trips) कर रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि उपभोक्ता बार-बार छोटी खरीदारी करने के बजाय एक साथ अधिक सामान खरीदना पसंद कर रहे हैं, जिसके कारण उनकी खरीदारी की आवृत्ति में कमी आई है। हालांकि, वस्तुओं की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण, प्रत्येक खरीदारी के समय वे अधिक धन खर्च कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कुल खर्च में 13% की वृद्धि दर्ज की गई है।
बाजार के इन बदलते रुझानों के बीच, ऑनलाइन बिक्री में भी बहुत तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। इस वृद्धि के मुख्य कारणों में बाजार में नए घरों का प्रवेश और खरीदारी के अवसरों में हुई वृद्धि शामिल है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाली खरीदारी अब उपभोक्ताओं की जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।
दूसरी ओर, पारंपरिक किराना स्टोरों की स्थिति की बात करें तो, वे अभी भी बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनकी बाजार हिस्सेदारी में थोड़ी कमी देखी गई है, लेकिन वे अभी भी उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं और बाजार में मजबूत पकड़ रखते हैं।
वस्तुओं के वर्गीकरण की बात करें तो, पर्सनल केयर (व्यक्तिगत देखभाल) उत्पाद सबसे तेजी से बढ़ने वाली श्रेणी के रूप में उभरे हैं। इस श्रेणी में बिक्री के मूल्य में महत्वपूर्ण वृद्धि देखी गई है, जो दर्शाता है कि उपभोक्ता अपनी व्यक्तिगत देखभाल के उत्पादों पर अधिक खर्च करने के लिए तैयार हैं।
इस प्रकार, भारत के शहरी बाजार में उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता और खरीदारी करने के तरीके दोनों में परिवर्तन आ रहा है। एक ओर मूल्य वृद्धि उपभोक्ताओं को कम बार खरीदारी करने के लिए मजबूर कर रही है, तो दूसरी ओर ऑनलाइन माध्यम और पर्सनल केयर उत्पादों की बढ़ती मांग बाजार को नई दिशा दे रही है। किराना स्टोरों की हिस्सेदारी में कमी आने के बावजूद, वे अभी भी बाजार के मुख्य खिलाड़ी के रूप में बने हुए हैं।
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