चक्रवात मुरासु में तमिलनाडु के 4 मछुआरों की मौत, 5 की तलाश जारी
आंध्र प्रदेश के तट पर नाव पलटने से हुई दुर्घटना में प्रशासन द्वारा बचाव कार्य तेज कर दिया गया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, दोपहर 2:39 · अपडेट दोपहर 2:15 · 3 मिनट का पाठ
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चक्रवात मुरासु के प्रकोप के बीच आंध्र प्रदेश के तट पर तमिलनाडु के मछुआरों की एक नाव पलटने की दुर्घटना में 4 मछुआरों की मौत हो गई है। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, इस दुर्घटना में कुल 9 मछुआरे सवार थे, जिनमें से 4 के शव मिल गए हैं, जबकि शेष 5 मछुआरों की तलाश के लिए बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रकाशम जिले के कलेक्टर पी. राजा बाबू ने यह जानकारी दी।
प्राप्त विवरण के अनुसार, ये मछुआरे 29 अक्टूबर को चेन्नई से निकले थे। चक्रवात की चेतावनी के मद्देनजर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने का निर्देश दिया गया था। इस निर्देश के पालन में 4 नावों को आंध्र प्रदेश के तट पर लंगर डाला गया था, जिसमें 3 नावें रामायपट्टनम बंदरगाह और 1 नाव निजामपट्टनम बंदरगाह पर रखी गई थी। कलेक्टर के अनुसार, 2 नवंबर को तमिलनाडु के अधिकारियों ने पुष्टि की थी कि सभी मछुआरे और उनकी नावें सुरक्षित हैं। हालांकि, 3 नवंबर को निजामपट्टनम में मौजूद नाव पर सवार 9 मछुआरों ने आंध्र प्रदेश या तमिलनाडु के अधिकारियों को सूचित किए बिना ही रामायपट्टनम की ओर प्रस्थान किया था।
रामायपट्टनम की ओर जाते समय यह नाव चक्रवात मुरासु की तेज हवाओं और लहरों की चपेट में आ गई और अंततः पलट गई। इस घटना के बाद कोस्ट गार्ड को तत्काल सूचित कर बचाव कार्य शुरू करने का आदेश दिया गया था। तमिलनाडु सरकार ने इन 9 मछुआरों की पहचान कर उनके नाम और तस्वीरें भी प्रशासन के साथ साझा की हैं। कलेक्टर पी. राजा बाबू ने बताया कि बरामद 4 शवों में से 3 शव कोथापट्टनम तट पर बहकर आए थे, जबकि चौथा शव सर्च ऑपरेशन के दौरान मिला। सभी शवों को स्थानीय सरकारी जनरल अस्पताल के शवगृह में स्थानांतरित कर दिया गया है।
इस मामले में तमिलनाडु के अधिकारियों के साथ बातचीत की गई है और वे आंध्र प्रदेश आ रहे हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शवों को तमिलनाडु के अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा। इसके अलावा, पलटी हुई नाव को भी किनारे लाने की तैयारी की जा रही है। गंभीर चक्रवाती तूफान 'मुरासु' मंगलवार तड़के आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर, नेल्लोर और नरसपुर के बीच, ओंगोल के पास टकराया था, जिसके कारण बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान शेष 5 मछुआरों को खोजने पर केंद्रित है।
चक्रवात वातावरण में उत्पन्न होने वाली एक प्राकृतिक आपदा है, जिसमें कम दबाव के क्षेत्र के कारण बहुत तेज हवाएं चलती हैं और भारी बारिश होती है। तटीय क्षेत्रों में इस प्रकार के तूफानों के कारण मछली पकड़ने और समुद्री गतिविधियों पर गंभीर असर पड़ता है, जिसके कारण हर साल हजारों मछुआरों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ता है।
इस समाचार का स्रोत
- India Today
- સંદેશ (દેશ)
- The Hindu
- NDTV (India)
- India Today
- India Today
- સંદેશ (દેશ)
- India Today
- The Hindu
- Hindustan Times
- Business Standard
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