केरल के मुख्यमंत्री ने पूर्व राज्यपाल द्वारा PSC चेयरमैन को हटाने की सिफारिश पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री वी.डी. सत्यन ने कहा कि राज्य सरकार से परामर्श किए बिना यह सिफारिश की गई है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:56 · अपडेट सुबह 3:14 · 6 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सत्यन ने पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) के चेयरमैन एम.आर. बैजू को हटाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से की गई सिफारिश की कड़ी आलोचना की है। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व राज्यपाल ने PSC चेयरमैन और कमीशन को बर्खास्त करने की जो सिफारिश की है, वह निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना की गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान के अनुसार ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सिफारिश करने से पहले राज्य सरकार से परामर्श करना अनिवार्य है, लेकिन इस मामले में राज्य सरकार के साथ एक बार भी कोई चर्चा नहीं की गई थी।
मुख्यमंत्री सत्यन ने स्पष्ट किया कि राज्यपाल द्वारा प्रक्रिया में की गई इस गलती का उपयोग PSC के भीतर चल रही अनियमितताओं को छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे राज्यपाल की कार्रवाई को हाईलाइट करके PSC के चेयरमैन और सदस्यों को बचाने के लिए अभियान चला रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल की सिफारिश और PSC में हुई अनियमितताएं दो अलग-अलग मुद्दे हैं। राज्यपाल द्वारा जो किया गया है, उसके बहाने PSC में किसी भी गलत काम करने वाले व्यक्ति को बचाया नहीं जाएगा।
यह पूरा विवाद स्टेट प्लानिंग बोर्ड के वरिष्ठ पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा से शुरू हुआ था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इस परीक्षा के बाद सभी 228 उम्मीदवारों की उत्तरपुस्तिकाओं में 58 अंकों के 10 वर्णनात्मक प्रश्नों का मूल्यांकन नहीं किया गया था। इसके बावजूद, PSC ने रैंक लिस्ट जारी कर दी और नियुक्तियां कर दीं। जब यह मामला केरल हाईकोर्ट पहुंचा, तो PSC ने तर्क दिया कि यह एक क्लर्क संबंधी और कंप्यूटर संबंधित गलती थी। हालांकि, क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में पता चला है कि यदि इन प्रश्नों का उचित मूल्यांकन किया गया होता, तो प्रथम स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार रैंक लिस्ट में स्थान नहीं पा सका होता।
जांच की गति धीमी होने पर हाईकोर्ट ने आलोचना की और पूछा कि भर्ती संस्था जांच में सहयोग क्यों नहीं कर रही है। इस दबाव के बाद, पिछले सप्ताह SIT ने पूर्व PSC डिप्टी सेक्रेटरी पी. सत्यन को गिरफ्तार किया। अब ऐसी संभावना है कि चेयरमैन एम.आर. बैजू को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि क्राइम ब्रांच की जांच में "चौंकाने वाले विवरण" सामने आए हैं। प्राथमिक जांच में पता चला है कि PSC ने अपने सहयोगियों, रिश्तेदारों और पार्टी के करीबियों को विभिन्न पदों पर नियुक्तियां दी हैं। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब युवाओं ने परीक्षाएं दीं, कोचिंग क्लास ली और लंबा इंतजार किया, लेकिन केवल चुनिंदा लोगों और पार्टी से संबंधित लोगों को पद दिलाने के लिए इन युवाओं को किनारे कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि ये अनियमितताएं केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं हैं। पुलिस को अब तक 180 से अधिक शिकायतें मिली हैं। इस कारण जांच का दायरा बढ़ाया गया है, जिसमें अब असिस्टेंट मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर परीक्षा, फिशरीज ऑफिसर्स और खाड़ी बोर्ड इंस्पेक्टरों की भर्ती प्रक्रियाओं की भी जांच की जाएगी। सत्यन ने आश्वासन दिया कि सरकार इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कमीशन में "क्लीन-अप एक्सरसाइज" करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि PSC की विश्वसनीयता बहाल की जाएगी।
इस बीच, मुख्यमंत्री ने अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया दी। आईएएस (IAS) अधिकारियों के तबादलों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये तबादले स्थापित नियमों के अनुसार किए गए हैं। केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) के चेयरमैन को बदलने के निर्णय को उन्होंने एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय बताया। उन्होंने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया कि ये तबादले सिविल सर्विस बोर्ड की मंजूरी के बिना किए गए हैं।
शराब के लाइसेंस देने के मामले में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बार को लाइसेंस देने के लिए अनुचित जल्दबाजी की गई है और सरकार की जानकारी के बिना ऐसे लाइसेंस नहीं दिए जाने चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि सरकार जल्द ही नई शराब नीति घोषित करेगी। इसके साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि पूर्व एलडीएफ (LDF) सरकार द्वारा नियम संशोधन के माध्यम से डिप्टी कमिश्नरों को बार लाइसेंस देने की जो शक्ति दी गई थी, उस पर पुनर्विचार किया जाएगा। नई नीति में इस व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा।
अंत में, एलपी/यूपी (LP/UP) स्कूल शिक्षकों (LPST) द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन के संबंध में मुख्यमंत्री ने सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने बताया कि सरकार उनके साथ आठ बार चर्चा कर चुकी है। विरोध प्रदर्शन के हिस्से के रूप में शिक्षकों ने अपने बाल काटे थे, जिसे देखकर मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए।
द हिंदू और एनडीटीवी की रिपोर्टों के अनुसार, यह पूरी घटनाक्रम केरल के प्रशासन और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता के मुद्दे पर गंभीर चर्चा छेड़ रहा है।
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर केरल के पूर्व राज्यपाल के रूप में कार्यरत थे, जो राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में भूमिका निभा रहे थे।
ન્યુઝીલેન્ડ સામે ટેસ્ટ શ્રેણી પૂર્વે બુમરાહ અને જાડેજા ઈન્ડિયા એ ટીમમાં સામેલ થશે
લિંકન ખાતે શનિવારથી શરૂ થતી ન્યુઝીલેન્ડ એ સામેની અંતિમ ચાર-દિવસીય મેચમાં દિગ્ગજ ખેલાડીઓ રમશે
BCI ने लॉ कोर्स के लिए आयु सीमा हटाई, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा किया
3 वर्ष और 5 वर्ष के LLB कोर्स में अब उम्र का कोई बंधन नहीं रहेगा
સીબીઆઈએ કિશોર બિયાણી અને ફ્યુચર રિટેલ સામે ₹૯૦૪ કરોડની છેતરપિંડીનો કેસ દાખલ કર્યો
સ્ટેટ બેંક ઓફ ઈન્ડિયાની ફરિયાદ બાદ સીબીઆઈએ મુંબઈમાં સર્ચ ઓપરેશન હાથ ધર્યું