अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी को बड़ी हार, इंडियन-अमेरिकन मतदाताओं का रुख बदला
डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल किया और ईरान के साथ युद्ध के परिणामों का असर देखने को मिला।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 12:39 · अपडेट सुबह 12:57 · 5 मिनट का पाठ
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अमेरिका में आयोजित मध्यावधि चुनावों के परिणामों में रिपब्लिकन पार्टी को भारी पराजय का सामना करना पड़ा है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों पर नियंत्रण प्राप्त कर बड़ी जीत हासिल की है। हालिया सर्वेक्षण और चुनावी आंकड़े दर्शाते हैं कि इंडियन-अमेरिकन मतदाता अब रिपब्लिकन पार्टी के बजाय डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की ओर झुक रहे हैं। इस बदलते रुख के पीछे H-1B वीजा पर प्रतिबंध, आव्रजन नियमों में अनिश्चितता और नौकरी के अवसरों को लेकर चिंताएं मुख्य कारण माने जा रहे हैं। इसके अलावा, बढ़ता भेदभाव और वर्तमान राजनीतिक माहौल भी इस समुदाय की पहचान और उनकी पसंद को प्रभावित कर रहा है।
बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव परिणामों के मुताबिक अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के 54 सदस्य हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के 44 सदस्य हैं। निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी ने 228 सदस्यों के साथ बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के पास केवल 139 सदस्य हैं। इस सदन में बहुमत के लिए 218 सदस्यों की आवश्यकता है और अभी 68 सीटों के परिणाम आने बाकी हैं। इस प्रकार, दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है।
रिपब्लिकन पार्टी की हार के संबंध में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में अपनी भूमिका स्वीकार करने के बजाय अन्य कारण दिए हैं। व्यावसायिक समाचार संस्थान बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि पेट्रोल की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिकी लोग उनके शासन द्वारा लाए गए आर्थिक लाभों को नहीं देख सके। उन्होंने ईरान के साथ युद्ध को पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियान को इस्लामिक गणराज्य को परमाणु हथियार प्राप्त करने से रोकने के लिए आवश्यक बताया। ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि यदि डेमोक्रेटिक पार्टी उनके साथ काम करना चाहती है, तो वे विपक्ष के नियंत्रण वाले हाउस और सीनेट के साथ काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के पास वीटो पावर की शक्ति होती है, जो एक बहुत ही मजबूत शक्ति है।
ट्रंप ने टेक्सास में केन पैक्सटन और साउथ कैरोलिना में डार्लिन ग्राहम जैसे सीनेट उम्मीदवारों के चयन में गलती करने के सवाल को खारिज कर दिया। उन्होंने टेक्सास के रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कॉर्नीन को "अविश्वसनीय व्यक्ति" बताया। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस हार को अपनी हार नहीं मानते क्योंकि वे स्वयं मतपत्र पर नहीं थे।
चुनाव परिणामों के बाद ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगहाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि यदि अमेरिका खतरनाक रास्ते पर चलता है तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद करमी ने भी गलत आकलन के खिलाफ चेतावनी दी है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोज़तबा खामेनी ने भी कहा कि यदि फिर से हमला हुआ तो उसका पलटवार बहुत बड़ा होगा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिकी लोगों ने युद्ध को 'ना' कह दिया है और वे इस संदेश का समर्थन करते हैं।
गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव परिणामों के बाद अब सवाल यह है कि ट्रंप ईरान के खिलाफ नया सैन्य अभियान शुरू करेंगे या राजनयिक समाधान की ओर बढ़ेंगे। सितंबर में रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सहयोगी चुनाव से पहले ईरान के साथ संघर्ष से बचना चाहते थे क्योंकि उन्हें डर था कि इससे पेट्रोल की कीमतें बढ़ेंगी और रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होगा। अब चुनाव समाप्त हो जाने से वह बाधा दूर हो गई है। हालांकि, कुछ खाड़ी देश मानते हैं कि यह हार ट्रंप को राजनयिक समाधान की ओर धकेल सकती है, जबकि अन्य को डर है कि ईरान इसे अमेरिका की कमजोरी समझ सकता है। जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के पीटर लोग ने कहा कि जब भी ट्रंप को कोने में धकेला जाता है, तो वे अधिक आक्रामक होकर बाहर आते हैं।
सैन्य स्थिति की बात करें तो, 2 नवंबर को अमेरिकी बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ईरानी स्थान केशम द्वीप पर हमला किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला पिछले कुछ हफ्तों में किए गए छोटे हमलों की एक श्रृंखला का हिस्सा था। इस दौरान अमेरिकी नौसेना का यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दक्षिण चीन सागर से मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का संकेत देता है।
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और वे रिपब्लिकन पार्टी के नेता के रूप में जाने जाते हैं। उनके शासनकाल के दौरान अमेरिका की विदेश नीति और आर्थिक निर्णयों ने वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।
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