लखनऊ स्टेशन पर फर्स्ट एसी कोच में महिला के ₹2.75 लाख के गहने और नकदी चोरी
पीड़ित महिला का आरोप, चार बार इमरजेंसी चेन खींचने के बावजूद RPF या रेलवे स्टाफ से कोई मदद नहीं मिली
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:41 · अपडेट सुबह 2:54 · 5 मिनट का पाठ
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भारतीय रेलवे के सबसे महंगे और सुरक्षित माने जाने वाले 'फर्स्ट एसी' (First AC) कोच में यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। ट्रेन नंबर 15726 (सिलचर - ओखा एक्सप्रेस) के फर्स्ट एसी कूपे में यात्रा कर रही एक महिला यात्री के साथ लखनऊ रेलवे स्टेशन पर चोरी की बड़ी घटना हुई है। इस घटना में चोरों ने महिला के कूपे से ₹2.5 लाख के सोने के गहने और ₹25,000 नकद चोरी कर लिए, जिससे महिला को कुल ₹2.75 लाख का नुकसान हुआ है।
टीवी9 गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार, फर्स्ट एसी कोच को यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित और आरामदायक माना जाता है और यह धारणा रखी जाती है कि यहाँ यात्रियों की सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, इस घटना ने रेलवे के ऐसे दावों की पोल खोल दी है। पीड़ित महिला ने बताया कि जब उन्हें चोरी का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत मदद पाने और ट्रेन को रोकने के लिए इमरजेंसी अलार्म चेन का उपयोग किया। महिला के अनुसार, उन्होंने लगातार 4 बार इमरजेंसी अलार्म चेन खींची, लेकिन इतनी बार चेन खींचने के बावजूद कोई भी रेलवे कर्मचारी या RPF (रेलवे सुरक्षा बल) का जवान उनकी मदद के लिए घटनास्थल पर नहीं पहुँचा।
एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित महिला ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। महिला ने बताया कि बार-बार चेन खींचने के बावजूद उनकी बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और ट्रेन स्टेशन से आगे बढ़ती रही। इस घटना के बाद महिला बहुत दुखी थी और रोते हुए अपनी व्यथा व्यक्त कर रही थी। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिला रेलवे की ढीली सुरक्षा व्यवस्था के प्रति अपना गुस्सा और पीड़ा व्यक्त करती दिख रही है। वीडियो में वह बताती है कि प्रीमियम कोच में यात्रा करने के बावजूद उन्हें सुरक्षा और मदद पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद नेटिज़न्स में भारी रोष देखा जा रहा है। लोग रेलवे प्रशासन और RPF की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि फर्स्ट एसी का किराया सबसे अधिक होता है, इसलिए यात्री उम्मीद करते हैं कि उन्हें प्राइवेसी के साथ पुख्ता सुरक्षा भी मिलेगी। लेकिन इस घटना ने साबित कर दिया है कि अब वीआईपी कोच भी चोरों की पहुँच से दूर नहीं हैं। कुछ लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि फर्स्ट एसी कूपे में यात्रा करने वाले लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो स्लीपर और जनरल क्लास के यात्रियों की हालत कैसी होगी। अन्य उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी की है कि 4 बार चेन खींचने के बाद भी RPF का न आना सुरक्षा में बड़ी चूक है और रेलवे किराया बढ़ा रहा है लेकिन यात्रियों के जान-माल की सुरक्षा शून्य है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए RPF और GRP ने इस मामले में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, जांच के साथ-साथ एक बड़ा सवाल यह खड़ा हुआ है कि रात के समय ट्रेन और स्टेशनों पर पेट्रोलिंग करने वाली सुरक्षा टीमें उस समय कहाँ थीं? यात्रियों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इस पर चर्चा शुरू हो गई है। महिला के अनुसार, ट्रेन अपनी यात्रा जारी रखती रही जिसके कारण उन्हें कोई तत्काल मदद नहीं मिल सकी और चोर सामान लेकर फरार हो गए।
इस घटना ने रेलवे के सुरक्षा दावों को एक बार फिर चुनौती दी है। फर्स्ट एसी जैसे प्रीमियम सेगमेंट में भी जब यात्री असुरक्षित महसूस करते हैं, तो पूरे रेलवे नेटवर्क की सुरक्षा व्यवस्था से विश्वास उठ रहा है। पीड़ित महिला ने रेलवे प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस और रेलवे अधिकारी इस चोरी के दोषियों को खोजने के लिए जांच कर रहे हैं और माना जा रहा है कि स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद रेलवे के सुरक्षा प्रोटोकॉल पर फिर से विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है, खासकर जब इमरजेंसी चेन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था होने के बावजूद यात्री को मदद नहीं मिली। इस घटना ने रेलवे के प्रीमियम यात्रियों में असंतोष पैदा किया है।
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