महाराष्ट्र में बड़ी सहकारी समितियों के लिए कानून में संशोधन, सरकार करेगी नियुक्तियां
₹500 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली सहकारी संस्थाओं में सरकार अब पांच सदस्यों की नियुक्ति कर सकेगी।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, शाम 4:08 · अपडेट रात 11:29 · 4 मिनट का पाठ
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई महाराष्ट्र राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट 1960 में महत्वपूर्ण संशोधन करने की मंजूरी दी गई है। इस निर्णय के तहत राज्य सरकार अब ऐसी सहकारी संस्थाओं के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) में पांच सदस्यों की नियुक्ति कर सकेगी, जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹500 करोड़ से अधिक हो और जिन्हें सरकार की ओर से भूमि, ऋण, गारंटी या अन्य फंड के रूप में सहायता प्राप्त होती हो। हालांकि, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों को इस नए संशोधन से पूरी तरह छूट दी गई है। राज्य सरकार इस बदलाव के लिए अध्यादेश जारी करेगी, जो कानून की धारा 73AA(2) में संशोधन करेगा।
सरकार द्वारा नियुक्त पांच सदस्यों में से एक सदस्य असिस्टेंट रजिस्ट्रार या उससे ऊपर के रैंक का सरकारी अधिकारी होगा, जिसे मतदान करने का अधिकार नहीं होगा। शेष चार सदस्य उद्योग विशेषज्ञ होंगे, जिन्हें बोर्ड की बैठकों में मतदान करने का अधिकार मिलेगा, लेकिन वे पदाधिकारी के चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। वर्तमान में बड़ी सहकारी समितियों में केवल दो निदेशकों को सह-पदेन (को-ऑप्ट) करने और दो सरकारी नामित सदस्यों को स्वीकार करने का प्रावधान है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य बोर्ड की बैठकों में उत्पन्न होने वाले गतिरोध को रोकना, कोरम पूरा करना सुनिश्चित करना और निर्वाचित बोर्ड के बजाय प्रशासकों की नियुक्ति से बचना है।
इस कानूनी बदलाव का सीधा असर कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ यानी 'गोकुल' डेयरी पर पड़ रहा है। गोकुल डेयरी ने वर्ष 2024-25 में ₹3,966.28 करोड़ का भारी-भरकम टर्नओवर दर्ज किया है। यह संस्था कोल्हापुर की 8,000 से अधिक ग्रामीण समितियों से दैनिक दूध संग्रह का कार्य करती है, जिसमें 4.41 लाख उत्पादक जुड़े हुए हैं, जो इसे क्षेत्रीय राजनीति में अत्यंत प्रभावशाली बनाता है। हाल ही में हुए चुनाव में कांग्रेस नेता सतेज पाटिल के पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीती थीं, जबकि सत्ताधारी महायुति गठबंधन को 12 सीटें मिली थीं। बोर्ड की बैठक के लिए 14 निदेशकों का कोरम आवश्यक है, जो 29 अक्टूबर को अध्यक्ष के चुनाव के समय महायुति के सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण पूरा नहीं हो सका था। अब सरकार द्वारा चार नए मतदान करने योग्य सदस्यों की नियुक्ति से, बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेशानुसार 10 नवंबर को होने वाले पुनर्चुनाव से पहले सत्ताधारी दल 16-13 का बहुमत प्राप्त कर सकता है।
इस निर्णय का विरोध करते हुए कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने इसे लोकतंत्र विरोधी बताया है। उन्होंने तर्क दिया कि चुनाव के बाद सरकार द्वारा की जाने वाली ऐसी नियुक्तियां मतदाताओं के वास्तविक जनादेश की अनदेखी करती हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि दुग्ध उत्पादकों से हार का सामना करने के बाद भाजपा ने नियम बदल दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने 12 सदस्यों को 16 में बदलकर बहुमत चोरी कर लिया है। दूसरी ओर, सरकारी अधिकारियों ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि इससे प्रशासनिक नियंत्रण में सुधार होगा, व्यावसायिक दक्षता बढ़ेगी और उच्च टर्नओवर वाली संस्थाओं में सार्वजनिक धन की रक्षा होगी।
सहकारी समितियां भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य सदस्यों के सामूहिक हितों की रक्षा करना और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना रहा है। महाराष्ट्र में सहकारी क्षेत्र का इतिहास काफी पुराना है और यह कृषि एवं डेयरी उद्योग में बुनियादी भूमिका निभाता है। ये संस्थाएं पहले भी राजनीतिक प्रभाव और प्रशासनिक नियंत्रण के मुद्दों को लेकर चर्चा में रही हैं।
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