IRDAI बीमा एजेंटों के कमीशन और वितरण व्यय के लिए नए नियम लाएगा
LIC के सीईओ ने बताया कि कंपनी पहले से ही अधिकांश प्रस्तावित सीमाओं का पालन कर रही है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 7:54 · 5 मिनट का पाठ
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भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) बीमा पॉलिसी बेचने वाले एजेंटों के कमीशन और बीमा कंपनियों के वितरण व्यय (डिस्ट्रिब्यूशन कॉस्ट) पर नए नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है। इन नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसका सीधा असर बीमा कंपनियों और उनके एजेंटों पर पड़ सकता है। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य बीमा कंपनियों के वितरण खर्च को नियंत्रित करना और ग्राहकों के हितों की रक्षा करना है।
इन प्रस्तावित बदलावों के संबंध में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के सीईओ और प्रबंध निदेशक आर. दोराइसवामी ने एक समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि LIC को इन नए नियमों से बहुत बड़ी कठिनाई होने की संभावना नहीं है, क्योंकि कंपनी पहले से ही अधिकांश प्रस्तावित सीमाओं के भीतर काम कर रही है। दोराइसवामी के अनुसार, LIC ने हमेशा पॉलिसी बेचने के नेटवर्क यानी वितरण पर होने वाले खर्च को सीमित रखा है। कंपनी कमीशन के अलावा वितरण से जुड़े अन्य खर्चों पर भी अपनी आंतरिक सीमाएं निर्धारित करती है।
उन्होंने आगे कहा कि IRDAI के परामर्श पत्र (कंसल्टेशन पेपर) में जो प्रस्ताव पेश किए गए हैं, वे अधिकांश मामलों में LIC के दायरे में ही हैं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ विशिष्ट उत्पादों और नियमित प्रीमियम पॉलिसी की कुछ समय अवधि में बदलाव करने की आवश्यकता पड़ सकती है। यदि नए नियमों के कारण किसी उत्पाद को वापस लेना पड़े, उसमें सुधार करना पड़े या उसे फिर से फाइल करना पड़े, तो उसका प्रभाव देखा जा सकता है। जिन बीमा कंपनियों का वितरण खर्च वर्तमान में अधिक है, उन्हें इन नए नियमों के कारण अधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
एजेंटों के लिए सबसे बड़ा सवाल उनके कमीशन को लेकर है। वर्तमान में IRDAI के प्रस्तावित नियमों पर विचार चल रहा है, इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि एजेंटों के कमीशन में कितनी कमी आएगी या उनकी कमाई पर कितना असर पड़ेगा। आर. दोराइसवामी ने स्पष्ट किया कि LIC अपने एजेंटों के दीर्घकालिक हितों की रक्षा करना चाहती है और उन्होंने एजेंटों को कंपनी की प्रगति का साथी बताया। LIC ने इस संबंध में नियामक संस्था (IRDAI) को अपने सुझाव और फीडबैक भेज दिए हैं। कंपनी को उम्मीद है कि अंतिम नियम बनाते समय बीमा कंपनियों और वितरण भागीदारों की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा।
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो, पहले कमीशन पर अलग से सीमाएं लागू थीं। इसके बाद कमीशन की सीमा हटा दी गई थी और एक्सपेंसेस ऑफ मैनेजमेंट (EOM) यानी प्रबंधन के कुल खर्च से जुड़े नियमों की व्यवस्था की गई थी। इस बदलाव के बाद कंपनियों के वितरण खर्च में वृद्धि हुई थी, जिसके कारण अब IRDAI फिर से कमीशन और वितरण व्यय पर नए नियम लाने पर विचार कर रहा है। दोराइसवामी के अनुसार, जीवन बीमा की कीमत और व्यवसाय करने के तरीके में सुधार लाने वाले कदम पूरे उद्योग के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं।
LIC के व्यावसायिक पहलुओं की बात करें तो, कंपनी का वैल्यू ऑफ न्यू बिजनेस (VNB) मार्जिन बढ़कर 22.3% हो गया है। सरल शब्दों में कहें तो, VNB मार्जिन से यह जाना जा सकता है कि कंपनी ने नई बेची गई पॉलिसियों के माध्यम से भविष्य में कितने लाभ की उम्मीद की है। इस सुधार का कारण बेहतर उत्पाद मिश्रण और नॉन-पार्टिसिपेटिंग पॉलिसियों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना है। नॉन-पार्टिसिपेटिंग पॉलिसियों में पॉलिसीधारक को कंपनी के लाभ में हिस्सा नहीं मिलता है, जबकि पार्टिसिपेटिंग पॉलिसियों में बोनस या अन्य लाभ मिल सकते हैं। LIC अब अपने व्यवसाय में इन दोनों प्रकार के उत्पादों का अनुपात लगभग एक-तिहाई और दो-तिहाई रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में LIC का मुख्य फोकस विभिन्न प्रकार के बीमा उत्पादों के विस्तार पर रहेगा। इसमें मुख्य रूप से व्यक्तिगत टर्म इंश्योरेंस, सेविंग्स प्लान, एन्युइटी और यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) शामिल हैं। इन उत्पादों के माध्यम से कंपनी अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने की योजना बना रही है। वर्तमान समय में बीमा क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और खर्च घटाने के लिए IRDAI के इन कदमों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे अंततः ग्राहकों को बेहतर सेवाएं और पॉलिसियां मिल सकें।
अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी बदलाव बीमा उद्योग की कार्यप्रणाली में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं, विशेष रूप से एजेंटों की कमाई और कंपनियों के खर्च के ढांचे में।
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