भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने के खिलाफ बांग्लादेश में विरोध और गंगा जल विवाद
नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता नाहिद इस्लाम ने भारत को कॉरिडोर देने का विरोध किया और गंगा जल समझौते में न्यायसंगत हिस्से की मांग की
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
31 अक्टूबर 2026, रात 10:08 · 6 मिनट का पाठ
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बांग्लादेश में भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने के प्रयासों के खिलाफ विरोध के सुर उठे हैं। नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के कन्वीनर नाहिद इस्लाम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बांग्लादेश की जमीन से भारत को किसी भी प्रकार का ट्रांजिट कॉरिडोर देने का प्रयास सहन नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, आगामी १२ दिसंबर को समाप्त होने वाले गंगा जल समझौते को लेकर भी उन्होंने भारतीय सरकार के साथ न्यायसंगत समझौता करने की मांग की है। नाहिद इस्लाम ने बताया है कि यदि नए समझौते में बांग्लादेश के हिस्से के पानी की सुरक्षा नहीं की जाएगी, तो देश के लोग सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
शुक्रवार को ढाका में NCP द्वारा एक रैली का आयोजन किया गया था, जिसमें सैकड़ों समर्थक जुड़े थे। यह रैली मुख्य रूप से गृह मंत्री सलाहउद्दीन अहमद और पावर, एनर्जी एंड मिनरल रिसोर्स मंत्री इकबाल हसन महमूद तुकु के इस्तीफे की मांग के साथ आयोजित की गई थी। विपक्षी दल ने आरोप लगाया था कि ये दोनों मंत्री कानून और व्यवस्था बनाए रखने तथा गैस और बिजली की कमी दूर करने में असफल रहे हैं। इस दौरान नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार पर भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया था।
नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया था कि जापान एक बार फिर बांग्लादेश के मार्ग से क्षेत्रीय कॉरिडोर बनाने का प्रयास कर रहा है और सरकार यह कॉरिडोर भारत को सौंपना चाहती है। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से स्पष्ट शब्दों में कहा कि बांग्लादेश की जनता ऐसा कोई भी अवैध कॉरिडोर स्वीकार नहीं करेगी। उल्लेखनीय है कि तारिक रहमान २६ से २९ अक्टूबर के दौरान जापान के प्रवास पर थे। इस मुलाकात के दौरान जापान और बांग्लादेश ने आपसी सहयोग बढ़ाने और बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की थी। दोनों देशों ने आर्थिक विकास, प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की थी।
जापान बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में माताबारी गहरे समुद्र बंदरगाह के विकास के लिए आर्थिक मदद कर रहा है। जापानी एजेंसी JICA इस प्रोजेक्ट को वित्तीय सहयोग दे रही है। जापान की क्षेत्रीय योजना में इस बंदरगाह के माध्यम से भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने की संभावनाओं को शामिल किया गया है। हालांकि, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने बताया था कि तारिक रहमान की जापान यात्रा के दौरान किसी तीसरे देश से जुड़े मुद्दे पर चर्चा नहीं की गई थी। उनके अनुसार, बातचीत का केंद्र केवल बांग्लादेश और जापान के बीच की आर्थिक साझेदारी थी। उन्होंने आगे जोड़ा कि यदि अन्य देशों के साथ के मुद्दों की चर्चा करनी हो, तो उन देशों के प्रतिनिधि भी टेबल पर मौजूद होने चाहिए।
भारत ने भी उत्तर-पूर्व क्षेत्र को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। २८ अक्टूबर को भारत ने जापान के साथ संबंधों को और मजबूत बनाने की बात कही थी। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि भारत और जापान के बीच ऐसी कई योजनाएं हैं जिनमें उत्तर-पूर्व भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है और भारत इन संपर्क प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना चाहता है। यह बयान ऐसे समय आया जब बांग्लादेश और जापान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सहमत हुए थे। जापान और बांग्लादेश के बीच बंगाल की खाड़ी इंडस्ट्रियल ग्रोथ बेल्ट (BIG-B) पहल को नई रणनीतिक सहयोग पहल में अपग्रेड करने पर भी सहमति बनी थी, जो कनेक्टिविटी, प्राकृतिक आपदाओं और भू-राजनीतिक जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
गंगा जल बंटवारे का मुद्दा भी अभी चर्चा के केंद्र में है क्योंकि १२ दिसंबर को वर्तमान समझौता समाप्त हो रहा है। १२ दिसंबर, १९९६ के दिन भारत और बांग्लादेश के बीच ३० वर्षों के लिए गंगा जल समझौता हुआ था। इस संधि के तहत पश्चिम बंगाल के फराका बैराज पर जनवरी से मई महीने के दौरान, यानी कम पानी की समयावधि में गंगा के पानी का बंटवारा तय किया गया है। बांग्लादेश चाहता है कि नया समझौता पहले की तुलना में अधिक लंबी अवधि के लिए हो और उसमें यह आश्वासन दिया जाए कि सूखे के मौसम में उसके हिस्से का पानी सुरक्षित रहे।
नाहिद इस्लाम ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बांग्लादेश इस बार गंगा जल समझौते में अपने न्यायसंगत हिस्से से एक बूंद भी कम स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समझौता बांग्लादेश के हितों के अनुसार नहीं हुआ, तो देश भर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। दूसरी ओर, भारत का कहना है कि गंगा जल बंटवारे सहित साझा नदियों से जुड़े सभी मुद्दों पर दोनों देशों के बीच संयुक्त नदी आयोग (JRC) द्वारा बातचीत होती है। इस आयोग की स्थापना १९७२ में की गई थी। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, गंगा जल समझौते को लेकर तकनीकी स्तर की बातचीत लगातार जारी है।
नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) फरवरी २०२५ में छात्र नेतृत्व के आंदोलन के माध्यम से रचित नेताओं द्वारा बनाई गई राजनीतिक पार्टी है। इस आंदोलन ने जुलाई-अगस्त २०२४ के विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था। वर्तमान में बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ इन विपक्षी दलों के आरोप और कॉरिडोर के मुद्दे पर उत्पन्न हुई अस्थिरता राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनी है। जापान द्वारा माताबारी बंदरगाह के विकास के लिए दी जाने वाली सहायता और उससे भारत-बांग्लादेश-जापान के त्रिपक्षीय आर्थिक संबंधों पर भी अब बांग्लादेश की स्थानीय राजनीति में दबाव बढ़ रहा है।
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