भगवद्गीता और नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियाँ यूनेस्को की मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल
भारत की इन दो अमूल्य कृतियों सहित कुल 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रहों को स्थान मिला है
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 1:30 · अपडेट दोपहर 1:36 · 2 मिनट का पाठ
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यूनेस्को के 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर' में श्रीमद्भगवद्गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियों को शामिल किया गया है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 17 अप्रैल तक इस रजिस्टर में 74 नए दस्तावेजी विरासत संग्रह जोड़े गए हैं, जिससे अब कुल पंजीकृत संग्रहों की संख्या 570 हो गई है।
यूनेस्को ने बताया है कि इस रजिस्टर में 72 देशों और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के दस्तावेजों को शामिल किया गया है। इन नए पड़ावों में वैज्ञानिक क्रांति, इतिहास में महिलाओं के योगदान और बहुपक्षवाद के प्रमुख मील के पत्थर पर नोट्स को भी शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025 को X पर एक पोस्ट के माध्यम से इस खबर पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इस घटना को दुनिया भर के हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा था, "यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में गीता और नाट्यशास्त्र का शामिल होना हमारे कालजयी ज्ञान और समृद्ध संस्कृति की वैश्विक मान्यता है। गीता और नाट्यशास्त्र ने सदियों से सभ्यता और चेतना का पोषण किया है। उनकी अंतर्दृष्टि दुनिया को प्रेरित करती रहती है।"
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी X पर इस मामले में खुशी व्यक्त की थी और इसे भारत की सभ्यतागत विरासत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया था। उन्होंने लिखा था, "यह वैश्विक सम्मान भारत की शाश्वत बुद्धि और कलात्मक प्रतिभा का जश्न मनाता है।" मंत्री ने आगे जोड़ा कि ये कालजयी कृतियां केवल साहित्यिक खजाने नहीं हैं, बल्कि वे दार्शनिक और सौंदर्य संबंधी आधार हैं जिन्होंने भारत के विश्वदृष्टिकोण और हमारे सोचने, अनुभव करने, जीने और अभिव्यक्ति करने के तरीके को गढ़ा है।
मंत्री शेखावत ने जानकारी दी थी कि इस नए समावेश के साथ अब इस अंतरराष्ट्रीय रजिस्टर में भारत की कुल 14 प्रविष्टियां शामिल हो गई हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में इन दोनों ग्रंथों के कुछ चित्र भी साझा किए थे।
नाट्यशास्त्र को प्रदर्शन कलाओं (performing arts) पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बुनियादी ग्रंथ माना जाता है।
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