शेख हसीना को वापस लाने के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं, बांग्लादेशी मंत्री का कड़ा बयान
भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत पूर्व प्रधानमंत्री को वापस लाने की तैयारी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, रात 10:42 · 3 मिनट का पाठ
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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने के प्रयासों के बीच बांग्लादेशी सरकार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें कोई पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज नहीं दिए जाएंगे। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायून कबीर ने अत्यंत कड़े शब्दों में कहा है कि शेख हसीना को भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि (extradition treaty) के तहत वापस लाया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि आतंकवादियों और अपराधियों को वापस लाने के लिए पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि उन्हें दूसरे देश द्वारा सौंपने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 नवंबर को ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान हुमायून कबीर ने यह बयान दिया था। मंत्री कबीर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री लियू हैशिंग के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल को विदा करने पहुंचे थे, तभी उनसे शेख हसीना को भारत से वापस लाने के संबंध में सवाल पूछे गए थे।
हुमायून कबीर ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि अस्तित्व में है और इसी समझौते के आधार पर हसीना को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा, "किसी आतंकवादी या अपराधी को वापस लाने के लिए पासपोर्ट की जरूरत नहीं होती। यह उन्हें सौंपने का मामला है।" मंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि शेख हसीना के खिलाफ न्यायिक वारंट जारी किया गया है और उन्हें वापस लाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया भी उपलब्ध है, इसलिए उन्हें सामान्य यात्री के रूप में पासपोर्ट या ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पूर्व प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाते हुए मंत्री ने कहा कि हसीना हजारों लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी सरकार उन्हें एक सामान्य यात्री के रूप में नहीं देख सकती। हुमायून कबीर ने दोहराया कि एक न्यायिक वारंट, स्थापित न्यायिक प्रक्रिया और प्रत्यर्पण संधि होने के कारण पासपोर्ट जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सत्ता से हटाए गए पूर्व प्रधानमंत्री की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि देश छोड़कर भागने से पहले वे हजारों लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार थीं।
ढाका के रुख को स्पष्ट करते हुए हुमायून कबीर ने बताया कि बांग्लादेश सरकार संधि के तहत स्थापित न्यायिक और राजनयिक माध्यमों से भारतीय अधिकारियों से हसीना को औपचारिक रूप से सौंपने की मांग कर रही है। बांग्लादेश सरकार लगातार भारत से शेख हसीना को वापस सौंपने की मांग कर रही है। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े छात्र आंदोलन और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद शेख हसीना ने देश छोड़कर भारत में शरण ली थी और तब से वह भारत में रह रही हैं।
इस बीच, बांग्लादेश में अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल ने 2025 में मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में शेख हसीना को মৃত্যুদंड की सजा सुनाई थी। हालांकि, हसीना ने अपने खिलाफ चले मुकदमे और दिए गए फैसले की वैधता पर सवाल उठाए हैं। ढाका का कहना है कि भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि के अनुसार उन्हें वापस भेजा जाना चाहिए, लेकिन भारत की ओर से अभी तक बांग्लादेश की इस मांग पर उन्हें सौंपने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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