GST काउंसिल द्वारा अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने के निर्णय को CII ने बताया ऐतिहासिक सुधार
व्यापारियों का विश्वास बढ़ाने और अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए GST काउंसिल ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
1 नवंबर 2026, शाम 6:58 · अपडेट रात 8:50 · 6 मिनट का पाठ
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भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने GST काउंसिल द्वारा कुछ अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने और प्रवर्तन शक्तियों को तर्कसंगत बनाने के जो निर्णय लिए गए हैं, उन्हें एक महत्वपूर्ण संस्थागत सुधार माना है। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, CII ने इस कदम को विश्वास-आधारित आर्थिक शासन की ओर एक बड़ा बदलाव बताया है और इसे भारत के लिए अगली पीढ़ी के आर्थिक सुधारों के लिए एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया है।
CII के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, "GST काउंसिल के निर्णयों को एक मील का पत्थर साबित होने वाले संस्थागत सुधार के रूप में विशेष मान्यता मिलनी चाहिए। इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व का गहरा सम्मान करते हैं, और प्रवर्तन, राजस्व सुरक्षा और करदाताओं के अधिकारों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सर्वसम्मति बनाने में राज्य सरकारों ने जो रचनात्मक भूमिका निभाई है, उसकी भी हम सराहना करते हैं।"
बनर्जी ने आगे कहा कि ऐसे बुनियादी बदलावों पर सहमति बनाना सहकारी संघवाद की एक बड़ी उपलब्धि है। यह केंद्र और राज्यों की उस इच्छा को दर्शाता है कि वे कानूनी उद्यमों में अधिक विश्वास रखने के लिए स्थापित नियामक पद्धतियों पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हैं।
8 अक्टूबर को हुई GST काउंसिल की 57वीं बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार, GST कानून के तहत गिरफ्तारी के प्रावधानों को हटाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा, अभियोजन (केस चलाने) की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ कर दी गई है। CGST अधिनियम की धारा 132 के तहत कुछ विशिष्ट अपराधों को सीमित किया गया है और जेल की सजा के प्रावधानों को तर्कसंगत बनाया गया है। इन सिफारिशों में सजा के लिए न्यायिक विवेक का अधिक उपयोग करने का प्रावधान है, जिसमें केवल जुर्माना लगाने का विकल्प शामिल है और कम से कम छह महीने की जेल की सजा के प्रावधान को हटा दिया गया है।
इन प्रस्तावित परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य वास्तविक व्यावसायिक विवादों और प्रक्रियात्मक गलतियों को जानबूझकर की जाने वाली टैक्स धोखाधड़ी और कर चोरी से अलग करना है। इन परिवर्तनों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक कानूनी सुधारों की आवश्यकता होगी।
CII के अनुसार, इन बदलावों से विशेष रूप से MSMEs और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को लाभ होगा। इससे अनिश्चितता, प्रतिष्ठा का जोखिम, कानूनी लागत और असमान आपराधिक परिणामों से जुड़े प्रबंधन के व्यवधानों में कमी आएगी।
बनर्जी ने आगे बताया कि, "इस सुधार का महत्व केवल इतना नहीं है कि कुछ प्रवर्तन शक्तियां वापस ली जा रही हैं। बल्कि महत्व इस बात का है कि GST काउंसिल ने स्वीकार किया है कि प्रभावी टैक्स प्रशासन के लिए आपराधिक सजा के डर पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। यह हाल के वर्षों में विश्वास-आधारित शासन की ओर सबसे प्रभावशाली कदम है, विशेष रूप से तब जब GST अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में पहुंच गया है।"
यह निर्णय कानूनी उद्यमों और आधुनिक टैक्स प्रशासन की क्षमता पर विश्वास दर्शाता है कि वह बेहतर जानकारी, तकनीक और लक्षित प्रवर्तन के माध्यम से राजस्व की रक्षा कर सकता है। Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, 1 नवंबर, 2026 से GST प्रक्रियाओं में कई बदलाव लागू हुए हैं, जिसमें छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए सरल पंजीकरण, त्वरित रिफंड और छूट के नए नियम शामिल हैं।
नए नियमों के तहत, जो छोटे व्यवसाय ई-कॉमर्स ऑपरेटरों (ECOs) के माध्यम से कई राज्यों में माल बेचते हैं, वे अधिक आसानी से पंजीकरण करा सकेंगे। जिन विक्रेताओं का मासिक इनपुट टैक्स क्रेडिट ₹2.5 लाख तक का है, वे किसी विशिष्ट राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को अपने मुख्य व्यवसाय के स्थान (PPoB) के रूप में घोषित कर सकेंगे। इससे अनुमानतः 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को लाभ होने की उम्मीद है।
रिफंड प्रक्रिया में भी कमी की गई है। इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर की अतिरिक्त राशि के लिए टैक्स अधिकारी की अनुमति के बिना ऑटोमैटिक सिस्टम द्वारा रिफंड दिया जाएगा। जीरो-रेटेड सप्लाई और इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के लिए रिफंड की 90% राशि प्रोविजनल रूप से ऑटोमेटेड प्रक्रिया के माध्यम से जल्दी जारी की जाएगी।
व्यापारियों को माल की आपूर्ति करने के बाद छूट देने में भी अधिक लचीलापन मिलेगा। अब पोस्ट-सप्लाई प्राइस रिडक्शन के लिए पूर्व-मौजूद अनुबंध होने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, क्रेडिट नोट्स जारी करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिवर्सल से संबंधित सुरक्षात्मक नियम जारी रहेंगे।
CII ने नोट किया कि 26 अक्टूबर को जारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) के परिपत्रों ने पंजीकरण, नोटिस और अधिनिर्णय (एडजुडिकेशन) से संबंधित व्यावहारिक चिंताओं का समाधान किया है। इसमें धोखाधड़ी के आरोपों को सबूतों के साथ साबित करना और टैक्स नोटिस में अधिक स्पष्टता देना शामिल है।
बनर्जी ने जोर देकर कहा कि इन सुधारों की सफलता के लिए उद्योगों को भी स्वैच्छिक अनुपालन, आंतरिक नियंत्रण और जिम्मेदार टैक्स व्यवहार के माध्यम से अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा, "हमें जिम्मेदार व्यवहार और मजबूत स्वैच्छिक अनुपालन के माध्यम से इसका जवाब देना चाहिए।"
CII ने यह भी सुझाव दिया कि काउंसिल का यह दृष्टिकोण आगामी आर्थिक सुधारों के लिए मॉडल बन सकता है, जिसमें भूमि उपयोग, निर्माण अनुमति, श्रम प्रशासन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में केंद्र, राज्य और स्थानीय अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी।
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