बच्चों और युवाओं में बढ़ रहे हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को लेकर चिकित्सीय चिंता
कम उम्र में हृदय रोग के बढ़ते मामलों के बीच विशेषज्ञों ने बदलती जीवनशैली और गलत खानपान को मुख्य कारण माना है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:07 · 4 मिनट का पाठ
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आज तक न्यूज आउटलेट की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 13 साल के बच्चे की स्कूल में अचानक मौत हो गई है। इस मामले में डॉक्टरों ने शुरुआती स्तर पर मृत्यु का कारण कार्डियक अरेस्ट होने की आशंका जताई है। इस घटना के कुछ दिन पूर्व ही दिल्ली के ममयूर विहार स्थित एक स्कूल में 9 साल की मासूम बच्ची की भी इसी तरह अचानक बेहोश होकर गिरने से मौत हो गई थी। इस मामले में भी हार्ट अटैक से मृत्यु होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, इन दोनों मामलों में मौत का सही कारण तो केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए ही पता चल सकेगा, लेकिन इन दोनों घटनाओं ने सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी गंभीर समस्याएं कैसे आ रही हैं।
इस पूरे मामले पर यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल के पिडियाट्रिक कॉर्डियोलॉजी विभाग के डॉ. गौरव कुमार ने विस्तृत जानकारी दी है। उनका कहना है कि बच्चों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले सामने आ रहे हैं। आज की तारीख में बच्चों की बदलती जीवनशैली, खाने-पीने की अस्वस्थ आदतें और खेलकूद में होने वाली कमी इसके पीछे एक बड़ा कारण मानी जा रही है। हालांकि, इसके अलावा बच्चों में हार्ट अटैक के पीछे जन्मजात हृदय के रोगों और हृदय की धड़कनों में अनियमितता जैसे कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं।
डॉ. गौरव आगे बताते हैं कि आजकल ज्यादातर बच्चे बाहर खुले मैदान में खेलने के बजाय मोबाइल फोन, टीवी और वीडियो गेम्स के पीछे अधिक समय बिता रहे हैं। इसके अलावा बच्चों में जंक फूड और पैकेज्ड स्नैक्स का सेवन भी बहुत बढ़ गया है। इन सभी आदतों के कारण बच्चों में कम उम्र में ही मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। इन सभी शारीरिक समस्याओं का सीधा असर बच्चों के नाजुक दिल पर भी पड़ रहा है।
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट दोनों अलग-अलग चिकित्सीय स्थितियां हैं, इसके बावजूद ये दोनों अत्यंत गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हैं। बच्चों के अंदर हार्ट अटैक के मामले अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन कार्डियक अरेस्ट किसी भी उम्र में हो सकता है। इस गंभीर स्थिति के कुछ लक्षण निश्चित रूप से देखने को मिलते हैं, जिसमें सांस का अचानक रुक जाना या सामान्य रूप से सांस न ले पाने की स्थिति शामिल है।
बच्चों के दिल को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए उनकी दैनिक जीवनशैली या दिनचर्या में खेलकूद को शामिल करना बहुत अनिवार्य है। बच्चों को रोजाना कम से कम 60 मिनट के लिए शारीरिक गतिविधियां यानी फिजिकल एक्टिविटी कराने की जरूरत है। इन गतिविधियों में साइकिल चलाना, दौड़ना, तैरना, फुटबॉल खेलना, बैडमिंटन खेलना और रस्सी कूदना जैसी शारीरिक गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। इस प्रकार की गतिविधियों से बच्चों का शरीर हमेशा सक्रिय रहता है और उनका दिल भी पूरी तरह फिट रहता है।
इन शारीरिक गतिविधियों के साथ-साथ बच्चों के आहार और खानपान पर विशेष ध्यान देना भी अत्यंत आवश्यक है। बच्चों को हमेशा ताजे फलों, हरी सब्जियों, दालों, साबुत अनाज और घर में ही बने पौष्टिक तथा संतुलित भोजन का सेवन कराना चाहिए। बच्चों को बाहर का जंक फूड और अत्यधिक चीनी या मिठास वाले खाद्य पदार्थों को कम से कम देना चाहिए ताकि उनका स्वास्थ्य उत्तम रह सके।
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