उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी और युवाओं से देशसेवा के लिए आह्वान किया
उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित 'सरदार कथा' कार्यक्रम में डॉ. शोभना राधाकृष्णन द्वारा सरदार पटेल के जीवन का वर्णन किया गया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
31 अक्टूबर 2026, शाम 7:55 · 4 मिनट का पाठ
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भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय एकता दिवस और सरदार वल्लभभाई पटेल की १५१वीं जन्मजंती के अवसर पर उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित 'सरदार कथा' कार्यक्रम में भाग लिया और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने देश के युवाओं से सरदार पटेल के एकता, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा कि २०४७ तक विकसित भारत बनाने के लिए भारत की यात्रा अधिक महत्वाकांक्षा और सामूहिक संकल्प द्वारा निर्देशित होनी चाहिए।
पीआईबी दिल्ली की रिपोर्ट के अनुसार, उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में प्रसिद्ध कथावाचक डॉ. शोभना राधाकृष्णन द्वारा प्रेरणादायी कथा प्रस्तुत की गई। उन्होंने भारत के लौह पुरुष के रूप में जाने जाने वाले सरदार पटेल के जीवन, उनके आदर्शों और राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल श्री तरनजीत सिंह संधू और अन्य प्रतिष्ठित मेहमान भी उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल की कहानी केवल भारत के महान नेताओं में से एक की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की एकता, साहस और राष्ट्र निर्माण की कहानी है। आज़ादी के बाद के समय में भारत की उल्लेखनीय यात्रा और २०४७ तक विकसित भारत की ओर प्रस्थान पर जोर देते हुए उन्होंने युवाओं से सरदार पटेल के एकता, साहस, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों को जीवन में उतारने के लिए कहा।
भारत के राजनीतिक एकीकरण में सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने बताया कि आज़ादी के समय देश के सामने कई चुनौतियाँ थीं। विभाजन के कारण अनिश्चितता पैदा हुई थी और ५५० से अधिक देशी रियासतों को भारतीय संघ में जोड़ने की आवश्यकता थी। सरदार पटेल ने अपने दृढ़ निश्चय, समझाने की शक्ति, प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक कुशलता के माध्यम से इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा किया था और एकता वाले भारत का विज़न दिया था। उन्होंने जोड़ा कि राष्ट्र हमेशा इस असाधारण योगदान के लिए कृतज्ञ रहेगा।
उपरराष्पति ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सरदार पटेल ने जिस एकता के मंत्र का प्रचार किया था, उसे २०४७ तक विकसित भारत के राष्ट्रीय मिशन में परिवर्तित किया जा रहा है। उन्होंने अवलोकन किया कि १९४७ से अब तक की भारत की यात्रा साहस, निश्चय और सामूहिक संकल्प को प्रतिबिंबित करती है, जबकि २०४७ की ओर की यात्रा बड़ी महत्वाकांक्षा, आकांक्षा और प्रतिबद्धता द्वारा चिह्नित होनी चाहिए।
सरदार पटेल के आदर्शों की निरंतर प्रासंगिकता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सत्य, सादगी, साहस, अनुशासन और अंतिम व्यक्ति की सेवा ऐसे मूल्य हैं जिन्हें राष्ट्र द्वारा बनाए रखने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से सरदार पटेल के जीवन से प्रेरणा लेने और उनकी अपार ऊर्जा, प्रतिभा और क्षमता को रचनात्मक राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों की ओर मोड़ने का आग्रह किया। अपने संबोधन के अंत में श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने कथा की शाश्वत परंपरा के माध्यम से सरदार पटेल के जीवन और विरासत को श्रोताओं तक पहुँचाने के लिए डॉ. शोभना राधाकृष्णन और उनकी टीम की प्रशंसा की। उन्होंने कहा था कि, "सरदार पटेल ने हमें एकता वाला भारत दिया है। इसे एकतापूर्ण, मजबूत और न्यायसंगत रखना हमारा कर्तव्य है। भारत एक है, और हमेशा एक रहेगा!"
इस कार्यक्रम से पहले, उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली के सरदार पटेल चौक पर और उपराष्ट्रपति भवन में सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। सरदार पटेल का असाधारण जीवन और विरासत राष्ट्रीय एकता, अटल निश्चय और निस्वार्थ सेवा की शक्ति के स्थायी प्रमाण के रूप में खड़े हैं। इस पवित्र अवसर पर राष्ट्र राष्ट्र निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करके इस महान द्रष्टा को हृदयपूर्वक श्रद्धांजलि देता है, जिनकी विरासत भारत की एकता और प्रगति की यात्रा में मार्गदर्शन करना जारी रखती है।
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