जी-२० के विदेश मंत्रियों की बैठक में सर्वसम्मति का अभाव, संयुक्त बयान रह गया
रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर मतभेदों के कारण अटलांटा बैठक विफल रही
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
1 नवंबर 2026, सुबह 8:15 · अपडेट रात 11:20 · 8 मिनट का पाठ
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अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-२० के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक बिना किसी संयुक्त बयान के समाप्त हो गई है। बिजनेस स्टैंडर्ड के एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की २० सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष राजनयिकों ने शनिवार को अपनी चर्चाएं पूरी कीं, लेकिन कई महत्वपूर्ण वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर सर्वसम्मति साधने में वे असफल रहे थे। खासतौर पर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर गहरे मतभेद अटलांटा बैठक के आरंभ से ही स्पष्ट दिख रहे थे, जिसका असर अंतिम परिणाम पर भी पड़ा था।
इन मतभेदों के परिणामस्वरूप, जी-२० समूह द्वारा कोई संयुक्त कम्यूनिक (joint communique) जारी नहीं किया गया है। इसके बजाय, अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने बैठकें पूर्ण होने के बाद एक चेयरमैन का बयान जारी किया था, जिसमें केवल चर्चाओं का सारांश दिया गया था। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, इस बयान में किसी भी प्रकार के हुए करारों का उल्लेख नहीं किया गया था। इसके बजाय, इसमें ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से लेकर नेविगेशन (नौकायन) की स्वतंत्रता जैसे प्राथमिकताओं के लिस्ट का उल्लेख किया गया था, जिसे जी-२० सदस्यों ने हल करने के लिए महत्वपूर्ण माना था।
बैठक के अंत में आयोजित एक न्यूज कॉन्फ्रेंस के दौरान मार्को रुबियो ने पत्रकारों से कहा था कि, "मैं आज आपके सामने ऐसा दावा नहीं कर रहा हूँ कि हम इन समस्याओं के सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत समाधान खोजने के करीब हैं।" हालांकि, उन्होंने जोड़ा था कि जी-२० में प्रतिनिधित्व रखने वाले कुछ देश निश्चित मुद्दों, खासतौर पर सप्लाई चेन और क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) के क्षेत्र में समाधान खोजने के लिए साथ मिलकर काम कर रहे हैं। रुबियो ने बैठक के पहले दिन चर्चाओं को "बहुत ही उत्पादक" करार दिया था।
शनिवार को रुबियो ने ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान के अपने समकक्षों के साथ अलग से बातचीत की थी। उसके बाद उन्होंने जी-२० के अंतिम कार्यक्रम का नेतृत्व किया था, जिसका मुख्य केंद्रबिंदु होर्मुज स्ट्रेट एवं लाल, काले और दक्षिण चीन सागर में नेविगेशन की स्वतंत्रता रखना था। रुबियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया था कि वृद्धि के लिए सुरक्षित सप्लाई चेन अनिवार्य है। उन्होंने लिखा था कि होर्मुज स्ट्रेट और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट सहित के महत्वपूर्ण व्यापारी मार्ग सुरक्षित और वाणिज्य के लिए खुले रहने चाहिए, और भविष्य की रक्षा के लिए क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और विस्तृत करना चाहिए।
शुक्रवार की रात जी-२० सहभागियों के लिए आयोजित एक रिसेप्शन में रुबियो ने आशावाद व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि, "साथ मिलकर, मुझे लगता है कि हम एक जीवंत, गतिशीलता और साहसिक आर्थिक भविष्य का नक्शांकन कर रहे हैं, जो पूरे विश्व के लिए नई क्षितिज खोलेगा।" हालांकि, रुबियो ने शुक्रवार को एकता की अपील के साथ बैठक की शुरुआत की होने के बावजूद, उन्होंने विदेश मंत्रियों के पारंपरिक ग्रुप फोटोग्राफ को रद्द कर दिया था। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, यूरोपीय राजनयिकों ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के समावेश के सामने आपत्ति उठाई थी और फोटोग्राफ के दौरान बहिष्कार करने या बाहर निकल जाने की धमकी दी थी।
पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की, जो पहली बार मेहमान के रूप में जी-२० बैठक में भाग ले रहे थे, उन्होंने सर्वसम्मति न मिलने पर आश्चर्य व्यक्त नहीं किया था। उन्होंने कहा था कि, "हमारे बीच युद्ध चल रहे हैं और उन युद्धों में शामिल सहभागी टेबल पर बैठे हैं, इसलिए सामान्य मुद्दे पर सहमत होना बहुत मुश्किल है।"
बैठक में भाग लेने वाले अन्य कुछ राजनयिकों ने, जिन्होंने नाम न बताने की शर्त पर बात की थी, बताया था कि सभी सदस्यों ने मतभेद होने के बावजूद उसे दूर करने का प्रयास किया था। उनका उद्देश्य अगले महीने फ्लोरिडा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा आयोजित जी-२० नेताओं की समिट को सफल बनाना था। इन राजनयिकों के मुताबिक, सहभागियों के बीच के गहरे मतभेदों के कारण चेयरमैन का बयान जारी करने की योजना पहले से ही थी। इन मतभेदों में रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान के सामने अमेरिका-इजरायल का युद्ध, अमेरिका के टैरिफ और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों का समावेश होता है। इन सभी कारकों ने वैश्विक ईंधन के भाव में वृद्धि की है और व्यापार के बारे में अनिश्चितता पैदा की है।
राजनयिकों ने बताया कि प्रारंभिक सत्र सौहार्दपूर्ण था, लेकिन यूक्रेन मुद्दे पर रूस का रुख अडिग था। इसके अलावा, रूस ने पोलैंड की जी-२० में सदस्यता का भी विरोध किया था। मतभेदों में ट्रम्प प्रशासन द्वारा जी-२० सदस्य दक्षिण अफ्रीका को आमंत्रण न देने का निर्णय भी शामिल था, जिसका अन्य देशों ने विरोध किया था।
जी-२० में समान विचारधारा रखने वाले भागीदारों के बीच भी मतभेद देखने को मिले थे। एशिया-पैसिफिक मंत्रियों के साथ रुबियो की बातचीत के बाद जारी किए गए संयुक्त बयान में आर्थिक वृद्धि के लिए "सुपर इंटेलिजेंस (SI)" के महत्व का छह बार उल्लेख किया गया था। इस शब्द के साथ छह फुटनोट्स थे, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान में "सुपर इंटेलिजेंस" का अर्थ "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" है। सितंबर में यूएन जनरल असेंबली में डोनाल्ड ट्रम्प ने "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" शब्द को नकली बताकर उसका नाम बदलकर "सुपर इंटेलिजेंस" किया था और अमेरिकी सरकार को यही शब्द इस्तेमाल करने का आदेश दिया था। अन्य किसी देश ने ऐसा कदम नहीं उठाया है।
अमर उजाला के रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक शुरू होने से पहले कुछ जी-२० देशों ने चिंता व्यक्त की थी कि अमेरिका ने रूस को तब आमंत्रण दिया जब रूस यूक्रेन पर हमले तेज कर रहा था। खासतौर पर जब ट्रम्प ने मास्को पर के नए प्रतिबंध हटाकर और यूक्रेन को लॉजिस्टिकल तथा इंटेलिजेंस सहायता सीमित करके संबंधों को निचले स्तर पर ले गए थे। हालांकि, स्टेट डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि उसने यूक्रेन के लिए २.१ अरब डॉलर के पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर्स की बिक्री के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
मार्को रुबियो ने लावरोव को अटलांटा में और पुतिन को समिट में आमंत्रित करने के निर्णय का बचाव करते हुए कहा था कि दोनों पक्षों से बात किए बिना संकट का शांतिपूर्ण समाधान लाना असंभव है। इसके बावजूद, उन्होंने वर्तमान परिस्थिति का गंभीर मूल्यांकन करते हुए शनिवार को कहा था कि, "मुझे पता नहीं है कि यूक्रेन में वार्ताओं के माध्यम से शांति प्राप्त की जा सकती है या नहीं। हम वह खोजने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यहाँ कोई ऐसा दावा कर रहा है कि हम वार्ताओं के माध्यम से समाधान के आरे हैं।"
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बताया था कि मास्को ऐसी परिस्थिति सहन नहीं करेगा जिसमें यूक्रेन रूसी फेडरेशन के कायदेमन्द के सुरक्षा हितों के लिए सैन्य खतरा बने। फरवरी २०२२ में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद और मास्को पर कड़े प्रतिबंध लगाने के बाद लावरोव बहुत ही कम बार नाटो सदस्य देशों की मुलाकात की है। दिसंबर में ट्रम्प के मियामी गोल्फ क्लब में आयोजित होने वाली समिट में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हाजिर रहेंगे या नहीं, यह अभी अस्पष्ट है।
इसके अलावा, ईरान में नए अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की संभावना भी जी-२० बैठक पर छाई हुई थी, जिसके कारण जी-२० सदस्य सऊदी अरब सहित के पूरे प्रदेश में तनाव है। रुबियो ने शुक्रवार को सऊदी के अपने समकक्ष प्रिंस फैसल बिन फहान और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान से मुलाकात की थी, जिसका देश मुख्य मध्यस्थ रहा है।
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