बिहार में शिक्षकों और स्टाफ के लिए फॉर्मल ड्रेस कोड अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने स्कूलों में जींस और टी-शर्ट पहनने पर प्रतिबंध लगाया और डीजे पर रोक लगाई
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
31 अक्टूबर 2026, रात 9:41 · 4 मिनट का पाठ
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बिहार के सभी शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक स्टाफ के लिए फॉर्मल ड्रेस कोड का कड़क पालन करने का आदेश दिया गया है। स्कूलों में अनुशासन बना रहे उस उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने शनिवार, ३१ अक्टूबर, २०२६ के दिन बताया था कि, स्कूल के परिसर में अनुशासन की भावना होना अनिवार्य है।
शिक्षा विभाग के प्रशासनिक डायरेक्टर विजय कुमार पांडे द्वारा ३० अक्टूबर, २०२६ के दिन एक पत्र जारी किया गया था। इस पत्र में सभी जिला अधिकारियों को सूचना दी गई है कि वे यह सुनिश्चित करें कि स्टाफ के सदस्य शिक्षण और ऑफिस के समय के दौरान फॉर्मल पोषाक में ही स्कूल में उपस्थित रहें। PTI के साथ बातचीत में मंत्री तिवारी ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने अधिकारियों को राज्य के सभी स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक स्टाफ के लिए फॉर्मल ड्रेस कोड का कड़क पालन करवाने के लिए कहा है।
ड्रेस कोड के आदेश के साथ-साथ, शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक कैंपस में मनोरंजन कार्यक्रमों के दौरान डीजे के उपयोग को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंत्री तिवारी ने बताया था कि कैंपस में मनोरंजन गतिविधियों के दौरान डीजे और डिस्को का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने 'विद्या ददाति विनयम्' (शिक्षा विनय देती है) की उक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि, शिक्षक का वर्तन, आचरण और पोषाक विद्यार्थियों के लिए बहुत ही महत्व रखते हैं, क्योंकि वे अपने शिक्षकों को रोल मॉडल के रूप में देखते हैं।
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने पहले भी स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में गतिविधियों के दौरान गरिमापूर्ण आचरण और अनुशासित वर्तन सुनिश्चित करने के लिए सूचनाएं दी थीं। हालांकि, विभिन्न स्रोतों से मिली रिपोर्टें सूचित करती हैं कि इन सूचनाओं का बड़े पैमाने पर कड़क पालन नहीं किया जाता है, जो गंभीर चिंता का विषय है। पत्र में दर्ज किया गया है कि पहले की सूचनाएं होने के बावजूद, शिक्षक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ जींस और टी-शर्ट जैसे कैजुअल कपड़े पहनकर स्कूलों में आते हैं ऐसी शिकायतें मिली हैं।
Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने स्कूलों में 'डांस, डीजे सेटअप, डिस्को और अन्य अश्लील या निचले स्तर के कार्यक्रमों' आयोजित करने पर भी सख्त प्रतिबंध लगाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी गतिविधियां शिक्षक व्यवसाय की गरिमा और शैक्षणिक वातावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार निर्धारित खास अवसरों पर अनुशासित और गरिमापूर्ण तरीके से आयोजित नृत्य और संगीत जैसे कार्यक्रमों की ही अनुमति दी जाएगी।
आदेश में न्यायिक गरिमा के साथ तुलना करते हुए पत्र में उल्लेख किया गया है कि, कानून की गरिमा बनाए रखने के लिए नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट में अवमानना की कार्रवाई के दौरान भी फॉर्मल ड्रेस अनिवार्य है। इस संदर्भ में, शिक्षा विभाग ने जोर दिया है कि शिक्षकों और गैर-शैक्षणिक स्टाफ ने भी इस प्रकार की संस्थागत अनुशासन का प्रतिबिंब डालना चाहिए क्योंकि वे युवा दिमाग को गढ़ने का काम करते हैं।
स्कूल के सत्ताधिकारियों को तात्कालिक असर से सभी स्टाफ के लिए गरिमापूर्ण फॉर्मल पोषाक अनिवार्य बनाने का निर्देश दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारियों को सूचना दी गई है कि वे परिसरों का सतत निरीक्षण करें और सूचनाओं का पूर्ण पालन हो वह सुनिश्चित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि क्लासरूम गंभीर शिक्षण के लिए हैं, कैजुअल हैंगआउट या पार्टी के मैदान के लिए नहीं।
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