बिहार के स्कूलों में रील बनाने वाले शिक्षकों और स्टाफ पर प्रतिबंध
छात्रों की गोपनीयता और अनुशासन बनाए रखने के लिए शिक्षा विभाग ने जारी किए सख्त आदेश
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 8:59 · अपडेट सुबह 9:07 · 4 मिनट का पाठ
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बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य के दौरान सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने या रील बनाने की गतिविधि पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बिहार शिक्षा विभाग ने हाल ही में एक नया नियम जारी किया है, जिसमें शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को कक्षा के समय के दौरान बिना अनुमति के वीडियो शूट करने या सोशल मीडिया पर रील अपलोड करने से मना किया गया है। इस नियम में न केवल शिक्षकों, बल्कि छात्रों को भी कक्षा के दौरान वीडियो शूट करने से रोका गया है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 4 नवंबर को जारी इस नियम में बिहार स्कूल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक निदेशक विजय कुमार पांडे ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) और जिला कार्यक्रम अधिकारियों (DPOs) को निर्देश दिए हैं। उन्होंने आदेश दिया है कि संबंधित अधिकारियों की पूर्व अनुमति के बिना शिक्षक या छात्र सोशल मीडिया के लिए वीडियो या रील न बनाएं। इसके साथ ही, जब स्कूलों में पढ़ाने का समय चल रहा हो, तब बाहरी लोगों या अनधिकृत आगंतुकों को भी स्कूल परिसर में प्रवेश करने से रोका गया है।
एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश कुमार ने इस मामले में शिक्षकों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा है कि, "अगर रील ही बनानी है तो थिएटर में शामिल हो जाना चाहिए।" सरकार की मुख्य आपत्ति यह है कि शिक्षक स्कूल के अंदर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बनने की कोशिश कर रहे हैं, जो बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनकी गोपनीयता का उल्लंघन है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस नए प्रावधान का उद्देश्य छात्रों की गोपनीयता की रक्षा करना, स्कूल में अनुशासन सुनिश्चित करना और पढ़ाई के घंटों के दौरान शिक्षकों तथा छात्रों का ध्यान भटकने से रोकना है।
विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द हिंदू को बताया कि कक्षा की गतिविधियों के दौरान छात्रों के साथ रील बनाना और फिर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पूरी तरह से अनुचित है। यदि इन नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो विभाग द्वारा शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य यह है कि कक्षा की गतिविधियों में कोई बाधा न आए और स्कूल का माहौल शिक्षा पर केंद्रित रहे।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि ये नियम बिहार गवर्नमेंट सर्वेंट कंडक्ट रूल्स, 1976 और बिहार गवर्नमेंट सर्वेंट कंडक्ट (संशोधन) रूल्स, 2026 के तहत जारी किए गए हैं। विभाग ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की है कि सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया कंटेंट बनाने और खुद को इन्फ्लुएंसर के रूप में प्रमोट करने के लिए स्कूल के संसाधनों का उपयोग कर रहे हैं। यदि शिक्षक या स्टाफ सोशल मीडिया का उपयोग करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने नियंत्रण अधिकारी से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
हालांकि, कुछ विशिष्ट अवसरों के लिए छूट दी गई है। सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्कूल के कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान, रक्त और अंगदान अभियान, स्वच्छता अभियान के साथ-साथ स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह जैसे अवसरों के वीडियो रिकॉर्ड किए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए भी संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके अलावा, अश्लील, अनुचित, आपत्तिजनक या मानहानिकारक कंटेंट, बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन करने वाली सामग्री या राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा को प्रभावित करने वाली पोस्ट अपलोड करने पर भी सख्त मनाही है। इन नियमों के कार्यान्वयन के लिए क्षेत्रीय शिक्षा डिप्टी डायरेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को जिम्मेदार बनाया गया है। इससे पहले 30 अक्टूबर को विभाग ने सभी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए फॉर्मल ड्रेस कोड का पालन करने का भी आदेश दिया था।
बिहार सरकार के कर्मचारियों के लिए आचार संहिता के नियमों में ये बदलाव इसलिए किए गए हैं ताकि शैक्षणिक संस्थानों की गरिमा बनी रहे।
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