परिवर्तन कार्यक्रम के जरिए कश्मीर के छोटे किसान अब एग्रीबिजनेस की ओर मुड़े
एचडीएफसी बैंक के सीएसआर प्रयासों से किसान अब बिचौलियों के बिना सीधे बाजार में उत्पाद बेच रहे हैं
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 1:30 · अपडेट दोपहर 1:37 · 5 मिनट का पाठ
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कश्मीर घाटी के छोटे किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर लाभदायक और आत्मनिर्भर एग्रीबिजनेस की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट और समुदाय के बीच मजबूत साझेदारी के कारण यह बदलाव संभव हुआ है। वर्षों से कश्मीर के किसान अनिश्चित मौसम, कटाई के बाद होने वाले भारी नुकसान और बिखरी हुई सप्लाई चेन जैसी समस्याओं से अकेले लड़ रहे थे। इस स्थिति के कारण छोटे किसान अपने प्रीमियम उत्पादों को बहुत कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर थे, जिसे डिस्ट्रेस-सेलिंग कहा जाता है।
वर्तमान में, एचडीएफसी बैंक के 'परिवर्तन' कार्यक्रम के तहत एक व्यवस्थित कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) हस्तक्षेप किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का कार्यान्वयन आईएसएपी (ISAP) इंडिया फाउंडेशन और सिटीजन्स फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है। श्रीनगर, पंपोर, पुलवामा और गांदरबल की क्षेत्रीय यात्रा के दौरान यह पाया गया कि इस पहल के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को आधुनिक प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और एकीकृत ब्रांडिंग प्रदान की जा रही है, ताकि किसान बाजार की मर्जी पर निर्भर रहने के बजाय खुद बाजार के नियम तय कर सकें।
एचडीएफसी बैंक की सीएसआर हेड नुसरत पठान ने इस पहल के बारे में बात करते हुए कहा, "कश्मीर अपने विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए जाना जाता है, और किसानों के लिए इससे प्राप्त मूल्य को बढ़ाने का यहां बड़ा अवसर है।" उन्होंने आगे कहा, "परिवर्तन कार्यक्रम के माध्यम से हम अपने भागीदारों के साथ मिलकर खेती के तरीकों में सुधार करने, फूड प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन करने और बाजार के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। 'समर्काश' (SAMARKASH) जैसी पहल किसान समूह को ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन के जरिए उनके उत्पादों को बाजार के और करीब ले जाने में मदद करती है।"
नुसरत पठान ने जोर देकर कहा कि एचडीएफसी बैंक की यह मदद केवल संपत्ति निर्माण तक सीमित नहीं है। बैंक द्वारा मानव संसाधन, संस्थागत एकत्रीकरण, क्षमता निर्माण, ज्ञान साझा करने और संपत्ति प्रबंधन (एसेट मैनेजमेंट) जैसे मामलों में पूर्ण सहायता प्रदान की जाती है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य उन्हें उस चरण तक ले जाना है जहां किसानों की किसी और पर निर्भरता न रहे। उन्होंने कहा, "स्थिरता (Sustainability) हमारी यूएसपी (USP) है।"
इस बदलाव के केंद्र में कॉर्पोरेट द्वारा समर्थित किसान समूहों का बदलाव है। वर्तमान में, इस क्षेत्र में समर्थित एफपीओ (FPOs) सामूहिक रूप से ₹5.2 करोड़ तक का राजस्व उत्पन्न कर रहे हैं। कुछ उच्च प्रदर्शन करने वाले व्यक्तिगत समूह, जैसे कि किरमनिया फ्रूट फेड फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC), अपना राजस्व बढ़ाकर ₹1.4 करोड़ तक पहुंचाने में सफल रहे हैं।
किरमनिया फ्रूट फेड एफपीसी के अध्यक्ष बशीर अहमद गनी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "पहले हम अपनी कटाई के तुरंत बाद कच्चे उत्पाद बेच देते थे और हमें जो कीमत दी जाती थी, उसे स्वीकार कर लेते थे।" उन्होंने आगे कहा कि अब समर्पित प्रोसेसिंग यूनिट्स, ड्राइंग फैसिलिटीज और एकीकृत ब्रांड मिलने के कारण, उनके सदस्य अब उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकिंग और बिक्री अपनी शर्तों पर कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम के तहत 'समर्काश' नाम से एक समर्पित कृषि ब्रांड की स्थापना की गई है, जो वैल्यू एडिशन में बड़ा सुधार लाता है। यह ब्रांड प्रोफेशनल ब्रांडिंग, स्टैंडर्ड पैकेजिंग और सीधे बाजार संबंधों के लिए संस्थागत सहायता प्रदान करता है। इससे किसान समूह शोषण करने वाले बिचौलियों को हटा सकते हैं और सीधे बड़े उपभोक्ता बाजारों तक पहुंच सकते हैं। इस तरह, कश्मीर के छोटे किसान अब केवल खेती नहीं कर रहे, बल्कि एक व्यावसायिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
इस पूरी पहल के माध्यम से कश्मीर के कृषि क्षेत्र में एक नया बदलाव आया है, जहां तकनीक, ब्रांडिंग और संस्थागत सहायता के समन्वय से किसानों को सशक्त बनाया गया है। यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक बन सकता है, जहां छोटे किसान अभी भी बिचौलियों के चंगुल में फंसे हुए हैं। एचडीएफसी बैंक और उसके भागीदारों द्वारा की गई इस रणनीतिक मदद से किसान अब आत्मविश्वास के साथ अपने उत्पादों का मूल्य बढ़ा रहे हैं और लंबी अवधि में आर्थिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ रहे हैं।
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