एसिडिटी की दवा रैनिटिडिन की सुरक्षा समीक्षा मामले में केंद्र सरकार को नोटिस
दिल्ली हाई कोर्ट ने रैनिटिडिन की सुरक्षा से जुड़े लंबित रिपोर्ट के मुद्दे पर केंद्र और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
4 नवंबर 2026, शाम 4:28 · अपडेट सुबह 8:31 · 3 मिनट का पाठ
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दिल्ली हाई कोर्ट ने एसिडिटी के उपचार में इस्तेमाल होने वाली जानी-मानी दवा रैनिटिडिन की सुरक्षा को लेकर चल रही समीक्षा में देरी के मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन सांबरे और न्यायाधीश संजय शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार, सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO), ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) से जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई फरवरी महीने में की जाएगी।
एडवोकेट डॉ. चंद्रेश जैन द्वारा दायर याचिका में तर्क दिया गया है कि सितंबर 2019 से रैनिटिडिन की सुरक्षा एक चिंता का विषय है। उस समय विदेशी ड्रग रेगुलेटर्स ने इस दवा में NDMA नामक संभावित कैंसरकारी तत्व की मौजूदगी होने की चेतावनी दी थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने 2020 में ही इस संबंध में नियामक कदम उठाए थे, लेकिन भारतीय ड्रग रेगुलेटर ने वर्षों बीत जाने के बावजूद कोई अंतिम या सार्वजनिक निर्णय नहीं लिया है।
याचिका में आगे कहा गया है कि 24 अप्रैल 2025 को DTAB ने यह मामला एक समिति और ICMR के अध्ययन के लिए भेजा था। केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट को पेश करने के लिए तीन महीने की समयसीमा तय की थी, जो 24 जुलाई 2025 को तय की गई थी और वह 24 अक्टूबर 2025 को पूरी हो गई थी। हालांकि, 7 अक्टूबर 2026 को भी CDSCO ने बताया कि रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है और मामला अभी भी समीक्षा के अधीन है।
याचिकाकर्ता ने अपनी प्रस्तुति में जोर दिया है कि यह दवा सस्ती और आसानी से उपलब्ध है, जिसे अधिकतर बिना प्रिस्क्रिप्शन के खरीदा जाता है। इसलिए, जिन लोगों के पास अन्य विकल्प नहीं हैं, वे इस अनिर्णित स्थिति का शिकार हो रहे हैं। अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और सिंगापुर जैसे देशों ने 2019 की चेतावनी के बाद इस दवा को लेकर कोई न कोई निर्णय लिया है।
रैनिटिडिन एक ऐसी दवा है जिसका उपयोग सामान्यतः एसिडिटी के उपचार के लिए और पेट में एसिड की मात्रा कम करने के लिए किया जाता है। हालांकि, 2019 में इसमें कैंसरकारी तत्व होने की आशंका व्यक्त किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर इसकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए थे और कई देशों ने इसकी बिक्री या उपयोग पर प्रतिबंध लगाए थे।
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