श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी पार्टी और लोकसभा से इस्तीफा देंगे
अनुच्छेद 370 के संबंध में वादे पूरे न होने के कारण नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने और सांसद पद त्यागने का निर्णय
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
3 नवंबर 2026, सुबह 2:14 · अपडेट रात 11:12 · 3 मिनट का पाठ
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श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) पार्टी और लोकसभा की सदस्यता, दोनों से इस्तीफा देने की घोषणा की है। रुहुल्ला मेहदी आज, 3 नवंबर को, बडगाम में अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक सार्वजनिक सभा में इस औपचारिक इस्तीफे की घोषणा करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से अनुच्छेद 370 के संबंध में किए गए वादों से अब पीछे हट रहे हैं।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, रुहुल्ला मेहदी ने पार्टी नेतृत्व पर वैचारिक प्रतिबद्धताओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी अनुच्छेद 370 पर केंद्र के निर्णयों को चुनौती देने के वादे पर अब पछता रही है या उससे पीछे हट रही है। रुहुल्ला मेहदी इससे पहले बडगाम से तीन बार विधायक रह चुके हैं और 2024 में वे श्रीनगर से सांसद चुने गए थे।
इसी बीच जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 विधायकों ने रविवार को पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का अल्टीमेटम दिया है। इन विधायकों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे सरकार का समर्थन वापस लेने की धमकी दी है। विधायकों ने इस मामले पर चर्चा करने के लिए 4 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बनाने का निर्णय लिया है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पार्टी के वरिष्ठ नेता और गुरेज के विधायक नजीर अहमद गुरेजी तथा थनामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल खान करेंगे। यह प्रतिनिधिमंडल पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिलकर उन्हें अपनी मांगों का एक पत्र (ज्ञापन) सौंपेगा। विधायकों ने नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार करने और उसके बाद आगे की रणनीति तय करने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक अस्थिरता के इस माहौल के बीच कैबिनेट विस्तार का मुद्दा भी चर्चा में है। 27 अक्टूबर को कैबिनेट विस्तार किया गया था, जिसमें एलजी मनोज सिन्हा ने शपथ दिलाई थी। इस विस्तार में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 4 विधायकों - अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को मंत्री बनाया गया था। हालांकि, इस प्रक्रिया में निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटा दिया गया था। इस विस्तार में कई वरिष्ठ विधायक जिनके नाम की चर्चा थी, उन्हें स्थान नहीं मिला, जिनमें नजीर अहमद गुरेजी और मुबारक गुल शामिल हैं। मुबारक गुल को बाद में फारूक अब्दुल्ला द्वारा अली मोहम्मद सागर के स्थान पर पार्टी के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया था।
पार्टी के भीतर इन आंतरिक विवादों के कारण कार्यकर्ताओं में भी भारी रोष देखा जा रहा है। श्रीनगर में पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। कल देर रात श्रीनगर के ईदगाह के पास 7 बार के विधायक मुबारक गुल के समर्थन में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को कश्मीर के मुद्दे पर फिर से बात की। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सरकार हमारी मदद नहीं कर सकती। उन्होंने पड़ोसी देश का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हर जगह कश्मीर का मुद्दा उठा रहा है और वह हमें बचा रहा है, अन्यथा हमारी सरकार का भविष्य अनिश्चित है।
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