रेत और खनिज के अवैध खनन को रोकने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा नए दिशा-निर्देश जारी
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए अंतरिम नियम लागू किए गए
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, रात 10:40 · 4 मिनट का पाठ
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आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य भर में रेत और अन्य खनिजों के अवैध खनन और उनके परिवहन पर नियंत्रण पाने के लिए व्यापक अंतरिम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच अंतर-विभागीय समन्वय को मजबूत करना है। इन दिशा-निर्देशों के तहत विभिन्न विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, और शिकायतों के समयबद्ध समाधान, संयुक्त क्षेत्र निरीक्षण, सख्त प्रवर्तन उपायों और कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के प्रावधान किए गए हैं।
मुख्य सचिव जी. साई प्रसाद द्वारा यह आदेश (G.O. Ms.No. 278) जारी किया गया था। यह निर्णय बापटला जिले में अवैध रेत खनन के संबंध में अमची कृष्णा मोहन द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ दायर जनहित याचिका (W.P. (PIL) No. 227 of 2026) में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर, 2026 को दिए अपने आदेश में सरकार को अवैध खनन को रोकने के लिए प्रभावी दिशा-निर्देश बनाने और प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्देश दिया था।
सरकारी आदेश में पिछले आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए हैं। खान एवं भूविज्ञान विभाग द्वारा जुलाई 2024 से जुलाई 2026 के बीच रेत के उल्लंघन से संबंधित 2,113 मामले दर्ज किए गए थे, जिसके लिए ₹6.24 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। इस अवधि के दौरान 117 वाहनों को ब्लैकलिस्ट किया गया था और 21 FIR भी दर्ज की गई थीं। वहीं लघु खनिज क्षेत्र में उल्लंघन के 9,120 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें जुर्माने की राशि ₹340.90 करोड़ थी।
नए नियमों के अनुसार, संबंधित भूमि के लिए जिम्मेदार क्षेत्र स्तर के अधिकारियों के लिए नियमित निरीक्षण करना और किसी भी शिकायत की प्रतीक्षा किए बिना सक्रिय रूप से अवैध गतिविधियों के बारे में रिपोर्ट करना अनिवार्य कर दिया गया है। जल संसाधन विभाग को नदी तल और जलाशयों का निरीक्षण करने, राजस्व विभाग को सरकारी राजस्व भूमि की निगरानी करने, वन विभाग को वन भूमि का निरीक्षण करने और पंचायत राज विभाग को अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाली भूमि की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
हेल्पलाइन, विजिलेंस ऐप, आवेदनों और अन्य आधिकारिक माध्यमों के साथ-साथ प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के माध्यम से प्राप्त सभी शिकायतों को जिला खान एवं भूविज्ञान अधिकारी (DMGO) द्वारा एक यूनिक केस आईडी के साथ दर्ज किया जाएगा। अन्य विभागों के अधिकारियों को प्राप्त शिकायतों को भी तुरंत DMGO को भेजना होगा। संबंधित विभागों को अनुरोध प्राप्त होने के तीन कार्य दिवसों के भीतर भूमि का वर्गीकरण, स्वामित्व का विवरण और भौगोलिक निर्देशांक प्रदान करने होंगे और संयुक्त क्षेत्र निरीक्षण के माध्यम से प्रत्येक शिकायत की जांच करनी होगी।
जहाँ उल्लंघन सिद्ध होगा, वहाँ अधिकारियों को उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करनी होगी। इसमें अधिक अवैध खनन को रोकना, खोदी गई मात्रा और राजस्व के नुकसान का आकलन करना, जुर्माने की वसूली, वाहनों की जब्ती और ब्लैकलिस्टिंग, FIR दर्ज करना, कार्रवाई और लीज तथा परमिट के खिलाफ कदम उठाना और राजस्व वसूली अधिनियम के तहत बकाया राशि की वसूली शामिल है। पुलिस अधीक्षकों को प्रवर्तन टीमों को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने और आपराधिक अपराधों में FIR दर्ज करना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा, जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स सक्रिय की जाएगी। इसमें एसपी, संयुक्त कलेक्टर, खान एवं भूविज्ञान के अधिकारी और राजस्व, वन, जल संसाधन, पंचायत राज, परिवहन, भूजल और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में होंगे।
आंध्र प्रदेश दक्षिण भारत के तट पर स्थित एक राज्य है। यह अपने कृषि, खनिज संसाधनों और तटीय क्षेत्रों के लिए जाना जाता है। राज्य में खनिज और रेत संसाधनों के प्रबंधन और उन पर नियंत्रण रखने की जिम्मेदारी विभिन्न सरकारी विभागों की है।
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