त्योहारों के मौसम में अपने वतन जाने के लिए migrant कामगारों में भारी भीड़
भारतीय रेलवे द्वारा त्योहारों के अवसर पर अट्ठारह हजार विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:25 · 3 मिनट का पाठ
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भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही हजारों migrant कामगार अपने वतन जाने के लिए उत्सुक होते हैं और रेलवे स्टेशनों पर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर के अंत से नवंबर के अंत तक चलने वाले इस त्योहारी सीजन में कारखानों, निर्माण स्थलों, रेस्तरां और अन्य अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले कामगार अपने परिवार के सदस्यों से मिलने तथा त्योहार मनाने के लिए वतन लौटते हैं। वतन की यह महा-वापसी केवल परिवार के साथ मिलन का अवसर नहीं है, बल्कि इसके आर्थिक पहलू भी बहुत दिलचस्प हैं। कामगार नए कपड़े, मिठाइयों और अन्य वस्तुओं पर तो खर्च करते ही हैं, लेकिन उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा यात्रा पर खर्च हो जाता है। टिकट और स्थानीय यात्रा के खर्च सहित कामगारों का कुल यात्रा खर्च ₹7,600 तक पहुँच सकता है।
इस यात्रा के पीछे का अर्थशास्त्र कई कठिनाइयों के बावजूद कामगारों को घर पहुँचने के लिए प्रेरित करता है। NDTV के अनुसार, भारत में त्योहार के समय की इस विशाल यात्रा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने व्यापक योजना बनाई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर द्वारा 2026 के त्योहारी सीजन के लिए 18,000 विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। पिछले साल यानी 2025 में 12,000 विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं, जिसकी तुलना में इस वर्ष ट्रेनों की संख्या में 50 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि की गई है।
हर साल जब दिवाली और छठ पूजा नजदीक आती है, तो दिल्ली, मुंबई, सूरत और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों के रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ और रेला देखने को मिलता है। बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाली सभी ट्रेनें पूरी तरह से भर जाती हैं और बसें भी खचखच भरकर चलती हैं। हालांकि, विशेष त्योहारों के लिए वतन जाने वाले कामगारों की निश्चित संख्या का कोई आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है।
इस संबंध में केंद्रीय श्रम मंत्रालय द्वारा 2011 की जनगणना का डेटा उपलब्ध है, जिसके अनुसार भारत में 4.14 करोड़ अंतर-राज्यीय migrant कामगार हैं। मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत में कुल प्रवासन दर 28.9 प्रतिशत थी और ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 26.5 प्रतिशत थी।
इसके अलावा, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच आयोजित किए गए हालिया नेशनल हाउसहोल्ड ट्रैवल सर्वे में भी भारतीयों की यात्रा के कारणों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। इस सर्वे के अनुसार, सामाजिक और धार्मिक गतिविधियाँ घर के लोगों द्वारा रात्रि प्रवास के साथ की जाने वाली यात्रा में 70.2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं। इस प्रकार की यात्रा के लिए 55.8 प्रतिशत लोगों ने बस को पसंदीदा वाहन माना, जबकि अंतर-शहरी रेलवे यात्रा की हिस्सेदारी 17.7 प्रतिशत रही।
सामान्य मासिक वेतन पाने वाले कामगार के लिए अपने वतन जाने की यह यात्रा एक बड़ा वित्तीय बोझ साबित होती है। कोविड-19 के लॉकडाउन के दौरान यह आर्थिक संघर्ष और यात्रा की वास्तविकताएँ बहुत बड़े पैमाने पर प्रकाश में आई थीं, जहाँ कई चुनौतियों के बीच भी कामगारों को अपने घर पहुँचने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ा था।
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