44 करोड़ के फर्जी टेंडर घोटाले में ED की 13 ठिकानों पर छापेमारी
निलंबित IAS अधिकारी और उनके साथियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, दोपहर 2:58 · अपडेट दोपहर 3:07 · 4 मिनट का पाठ
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त्रिपुरा में सरकारी टेंडर दिलाने के बहाने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। आज तक की एक रिपोर्ट के अनुसार, ED के अगरतला सब-ज़ोनल ऑफिस की टीम ने बुधवार को त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित तीन राज्यों में कुल 13 अलग-अलग स्थानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। इस पूरे घोटाले में त्रिपुरा कैडर के एक निलंबित IAS अधिकारी और उनके कथित साथियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कई लोगों को फर्जी सरकारी टेंडर दिलाने का लालच देकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की है। बताया गया है कि इस पूरे घोटाले में धोखाधड़ी की कुल राशि ₹44 करोड़ से अधिक है। ED ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के हिस्से के रूप में की गई है। इस मामले में पश्चिम त्रिपुरा जिले के कैपिटल कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR को आधार बनाया गया है। यह FIR नागपुर की एक कंपनी 'मैसर्स एस.के. सेल्स कॉरपोरेशन' द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी।
शिकायतकर्ता कंपनी एस.के. सेल्स कॉरपोरेशन ने आरोप लगाया था कि उन्हें सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर धोखा देकर पैसे जमा करने के लिए प्रेरित किया गया था। शिकायत के अनुसार, सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच कंपनी से बयाना राशि (EMD) के नाम पर लगभग ₹14.55 करोड़ की राशि वसूली गई थी। यह राशि कथित तौर पर मिड-डे मील और बिजली क्षेत्र से जुड़े सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर ली गई थी। हालांकि, जांच एजेंसी ने खुलासा किया है कि जिन टेंडरों के लिए यह राशि जमा की गई थी, वे टेंडर वास्तव में कभी जारी ही नहीं किए गए थे। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू कर दी है।
बुधवार को की गई छापेमारी के दौरान ED की टीम ने निलंबित IAS अधिकारी के आवास पर भी तलाशी ली। इसके अलावा, उत्तर त्रिपुरा के धर्मनगर सब-डिवीजन में कथित हवाला ऑपरेटरों से जुड़े ठिकानों की भी जांच की गई। एजेंसी के अनुसार, इन हवाला ऑपरेटरों को कथित तौर पर ऐसे आधिकारिक व्यक्तियों के रूप में पेश किया गया था जो भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जिम्मेदार थे। जांच में अब यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी टेंडर के नाम पर वसूली गई यह बड़ी राशि अंततः किन व्यक्तियों तक पहुंची है। साथ ही, इस पूरे नेटवर्क में हवाला ऑपरेटरों और अन्य साथियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है।
छापेमारी के दौरान ED ने ऐसी कई कंपनियों और संस्थाओं के कार्यालयों की भी जांच की जो कथित तौर पर वित्तीय लेनदेन से जुड़ी थीं। जांच के दौरान एजेंसी को हवाला लेनदेन से संबंधित बड़ी संख्या में दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा, कुछ महंगी संपत्तियों का विवरण और कुछ कॉर्पोरेट संस्थाओं पर संदिग्ध नियंत्रण से जुड़े रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। एजेंसी अब इन दस्तावेजों के माध्यम से धोखाधड़ी की राशि के उपयोग और उसके निवेश के बारे में जानकारी जुटा रही है।
जांच एजेंसी ने छापेमारी के दौरान आरोपियों से जुड़े डिजिटल उपकरण और रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। ED के अनुसार, ये इलेक्ट्रॉनिक सबूत जारी जांच के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन उपकरणों और रिकॉर्ड के विश्लेषण से वित्तीय लेनदेन, आरोपियों के बीच संपर्क और फर्जी टेंडर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान हो सकती है। जांच एजेंसी अब जब्त किए गए सभी दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की विस्तृत जांच करेगी। ED के मुताबिक, अलग-अलग पीड़ितों से कुल ₹44 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
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