IIT छात्र की मौत की CBI जांच के लिए अभिभावकों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की
जाति आधारित अपमान के आरोप के साथ साहिल वाकोडे के माता-पिता ने स्वतंत्र जांच की मांग की
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
31 अक्टूबर 2026, रात 8:09 · 3 मिनट का पाठ
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IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मृत्यु के मामले में उसके माता-पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने साहिल की मौत की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) या स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा जांच कराने की मांग की है। द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, रवीन्द्र और सोनाली वाकोडे द्वारा एडवोकेट हितेन्द्र गांधी के मार्फत यह पिटिशन दाखिल की गई है।
२० वर्षीय साहिल वाकोडे ने १८ सितंबर के दिन आत्महत्या की थी। वाकोडे के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा जाति आधारित अपमान का सामना कर रहा था। पिटिशन में यह आरोप लगाया गया है कि पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच करने में विफलता दर्शाई है, इसलिए जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा मॉनिटर किए जाने की मांग की गई है। इस से पहले, वाकोडे की शिकायत के आधार पर पवई पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने और अन्य अपराधों का मामला दर्ज किया था।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पिटिशन में संस्थान को उस दिन के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई है। इसके अलावा, जो छात्र या फैकल्टी सदस्य उस दिन घटी घटनाओं को देखे हों, उन्हें कोई भी व्यक्ति प्रभावित न करे यह सुनिश्चित करने के लिए गवाहों की सुरक्षा की भी मांग की गई है। पिटिशन में संस्थान के अधिकारियों की कार्रवाई की तरफ जांच directed करने की मांग की गई है।
साहिल वाकोडे IIT बॉम्बे में दूसरे वर्ष के BTech के छात्र थे। उसके माता-पिता ने आरोप लगाया है कि कुछ फैकल्टी सदस्यों और इनविजिलेटर ने साहिल के विरुद्ध जातिवादी टिप्पणियां की थीं, जिसके कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया था। पिटिशन में आगे बताया गया है कि साहिल पर प्रोफेसर सूर्यनारायण डूलाल द्वारा जाति आधारित टिप्पणियां की जाती थीं, जो १८ सितंबर के दिन परीक्षा के दौरान इनविजिलेटर के रूप में भी उपस्थित थे।
अर्जी में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब साहिल को IIT में कमरा आंटित किया गया था तब वह डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का चित्र लटकाना चाहता था। हालांकि, उसके रूममेट द्वारा उसे सलाह दी गई थी कि वह ऐसा न करे क्योंकि उसे जाति आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ सकता है। जब साहिल ने यह बात अपने माता-पिता को बताई, तब संघर्ष टालने के लिए उन्होंने भी उसे फोटो न लटकाने की सलाह दी थी। यह पिटिशन सोमवार, ३१ अक्टूबर, २०२६ के दिन कोर्ट में प्रस्तुत की जा सकती है।
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