उपभोक्ताओं को गुमराह करने के लिए FSSAI ने पेप्सिको और मॉन्स्टर कंपनियों पर की कार्रवाई
खाद्य नियामक ने उच्च कैफीन वाले उत्पादों को 'एनर्जी ड्रिंक' के रूप में मार्केटिंग करने का आरोप लगाया
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 2:23 · 3 मिनट का पाठ
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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने प्रसिद्ध पेय निर्माता कंपनियों पेप्सिको (PepsiCo) और मॉन्स्टर बेवरेज (Monster Beverage) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। द इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों कंपनियों पर अपने उत्पादों की मार्केटिंग करते समय 'एनर्जी ड्रिंक' (Energy Drink) लेबल का उपयोग करके उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया गया है। इस लेबल पर प्रतिबंध को उचित ठहराते हुए खाद्य नियामक ने कहा है कि कंपनियों ने उपभोक्ताओं को धोखा देने के लिए इस तरह की लेबलिंग का सहारा लिया है।
यह पूरा विवाद अब एक कानूनी लड़ाई में बदल गया है। FSSAI ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के पेय पदार्थों में मौजूद घटक सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरे साबित हो सकते हैं। नियामक के अनुसार, इन उत्पादों में कैफीन, चीनी और टॉरिन (taurine) की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। इन्हीं कारणों से फूड वॉचडॉग ने इन पेय पदार्थों को 'एनर्जी ड्रिंक' के रूप में पहचानने के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
FSSAI का दावा है कि जब उच्च कैफीन वाले उत्पादों को एनर्जी ड्रिंक के रूप में पेश किया जाता है, तो सामान्य उपभोक्ता इससे होने वाले संभावित जोखिमों से अनजान रहते हैं। इसलिए, उपभोक्ताओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस लेबलिंग पर प्रतिबंध लगाया गया है। नियामक ने नोट किया है कि कंपनियों ने इन नियमों का उल्लंघन कर उपभोक्ताओं को भ्रमित किया है।
इस कानूनी विवाद में खाद्य नियामक अपनी बात पर अडिग है और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों को प्राथमिकता दे रहा है। कैफीन और चीनी के अत्यधिक सेवन से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं और टॉरिन जैसे घटकों के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह कार्रवाई की गई है। पेप्सिको और मॉन्स्टर बेवरेज जैसी बड़ी कंपनियों के खिलाफ इन आरोपों ने उद्योग में चर्चा छेड़ दी है।
नियामक ने जोर देकर कहा है कि किसी भी खाद्य या पेय निर्माता कंपनी को अपने लेबल पर गलत या भ्रामक दावे नहीं करने चाहिए। विशेष रूप से जब यह स्वास्थ्य से जुड़ा हो, तो पारदर्शिता अनिवार्य है। इस मामले में अब कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिसमें दोनों कंपनियों को अपनी मार्केटिंग रणनीति और लेबलिंग का तर्क प्रस्तुत करना होगा।
यह पूरी घटना दर्शाती है कि भारत सरकार और उसकी खाद्य सुरक्षा एजेंसियां अब उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ समझौता करने को तैयार नहीं हैं। उच्च कैफीन युक्त पेय पदार्थों के बढ़ते उपयोग और उससे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए FSSAI द्वारा सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इस कानूनी लड़ाई का परिणाम अन्य पेय निर्माता कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।
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