भारत में मध्यम वर्ग के खर्च में उछाल और बढ़ता कर्ज
क्रेडिट की सुलभता बढ़ने से उपभोक्ता ऋण के आंकड़ों में वृद्धि हुई है और ब्याज दरों के कारण डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ गया है।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
5 नवंबर 2026, सुबह 2:27 · 2 मिनट का पाठ
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The Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मध्यम वर्ग के उपभोग और खर्च के स्तर में बड़ा उछाल देखा जा रहा है, लेकिन इस बढ़ते खर्च के पीछे कर्ज का एक बड़ा पहाड़ खड़ा हो रहा है। रुचि भाटिया और अनुप रॉय द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में उपभोक्ताओं द्वारा लिए जाने वाले ऋण और उधार लेने की गतिविधियों में अत्यंत महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है।
क्रेडिट या ऋण प्राप्त करने की सुविधा अब आबादी के एक बड़े हिस्से तक आसानी से पहुंच रही है, जिसके कारण उपभोक्ता उधार लेने की गतिविधियों में बड़ा उछाल आया है। क्रेडिट की इस बढ़ती सुलभता के कारण लोग अधिक खर्च कर रहे हैं, लेकिन साथ ही वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
The Economic Times की रिपोर्ट में नवजोत सिंह जैसे व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है, जो ऋण लेने के कारण आने वाले वित्तीय बोझ का उदाहरण पेश करते हैं। ऋण अब लोगों के बीच व्यापक हो गया है, जिसके कारण व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है।
ब्याज दरों में हो रही वृद्धि के कारण उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें बढ़ रही हैं। जैसे-जैसे ब्याज दरें बढ़ती जा रही हैं, वैसे-वैसे उपभोक्ताओं के लिए अपने कर्ज पर डिफॉल्ट करने या भुगतान करने में विफल रहने का जोखिम भी बढ़ता जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सोने पर ऋण लेने की गतिविधि और अनौपचारिक ऋण (informal loans) लेने के मामले भी तेज हुए हैं। लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए इस प्रकार के विकल्पों का अधिक उपयोग कर रहे हैं।
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