मद्रास यूनिवर्सिटी और सदरलैंड ग्लोबल सर्विसेज के बीच AI लैब के लिए समझौता
महिला अध्ययन विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब की स्थापना की जाएगी
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, सुबह 1:08 · 2 मिनट का पाठ
यह समाचार AI ने नीचे दिए स्रोतों से लिखा है; इसका हर दावा और आँकड़ा उन स्रोतों से मिलाकर ही प्रकाशित किया गया है। हम कैसे जाँचते हैं
मद्रास यूनिवर्सिटी (UoM) के सिंडिकेट ने शुक्रवार को डिजिटल-ड्रिवन बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी सदरलैंड ग्लोबल सर्विसेज के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य यूनिवर्सिटी के महिला अध्ययन विभाग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रयोगशाला की स्थापना करना है।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, यह नई पहल पिछले एक समझौते का विस्तार है। अप्रैल 2019 में हुए पुराने समझौता ज्ञापन के तहत, सदरलैंड ग्लोबल सर्विसेज ने महिला अध्ययन विभाग में 'जेंडर लैब' स्थापित करने के लिए ₹50 लाख आवंटित किए थे। इस लैब के माध्यम से यूनिवर्सिटी के चारों कैंपस के छात्रों के लिए 'जेंडर सेंसिटाइजेशन और वर्कप्लेस रेडीनेस' पर ऑनलाइन कोर्स संचालित किए जाते थे।
हालांकि, लॉकडाउन के कारण यह लैब लंबे समय तक बंद रही, जिसके परिणामस्वरूप वहां मौजूद डिजिटल उपकरण और मशीनें खराब हो गईं। अब कंपनी ने इस पुराने समझौते को नवीनीकृत करने और लैब को अपग्रेड करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत कंपनी लैब में नई प्रणालियां और आधुनिक बुनियादी ढांचा स्थापित करेगी।
नए समझौता ज्ञापन का उद्देश्य न केवल पुरानी जेंडर लैब को पुनर्जीवित करना है, बल्कि इसके साथ ही 'इनक्लूसिव एजुकेशन' (समावेशी शिक्षा) के लिए एक अलग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब स्थापित करने की योजना भी है। इस AI लैब के माध्यम से 'एप्लीकेशन ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' विषय पर कोर्स के लिए विशेष ई-मॉड्यूल विकसित किए जाएंगे, जो शिक्षा में तकनीक के समावेश को बढ़ावा देंगे।
इस प्रकार, सदरलैंड ग्लोबल सर्विसेज द्वारा की गई इस पहल से यूनिवर्सिटी के छात्रों को आधुनिक तकनीक और सामाजिक जागरूकता दोनों क्षेत्रों में नया मार्गदर्शन मिलेगा। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में महिला अध्ययन विभाग की क्षमता में वृद्धि होगी और छात्रों को उद्योग-उन्मुख कौशल सीखने का अवसर मिलेगा।
इस प्रकार, यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर्णय शिक्षा और उद्योग के बीच के सेतु को मजबूत करेगा। विशेष रूप से AI जैसी उभरती तकनीक का उपयोग करके समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है, जो भविष्य के शैक्षणिक ढांचे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।
अगस्त्यमलाई में रेशमी कपास उगाने वाले गैर-निवासी FRA कानून के तहत अपात्र
सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी निवासियों और जंगल के बाहर रहने वाले लोगों को पारंपरिक वनवासी मानने से इनकार किया
तेलंगाना के शहरों को क्लाइमेट-प्रूफ बनाने के लिए ₹20,000 करोड़ की परियोजना की योजना
राज्य सरकार 'तेलंगाना राइजिंग 2047' विजन के तहत शहरों को जलवायु परिवर्तन के प्रति सक्षम बनाएगी
तमिलनाडु सरकार 12,646 ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के लिए भत्ता आवंटित करेगी
प्रत्येक कार्यालय को ₹1,000 के मासिक रखरखाव कोष का आवंटन किया गया है