इंदौर में 10 महीने में 50 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी, पुलिस ने 7 करोड़ रिकवर किए
जनवरी से अक्टूबर के बीच साइबर अपराध की लगभग 7,000 शिकायतें दर्ज
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
6 नवंबर 2026, सुबह 5:30 · अपडेट सुबह 5:36 · 3 मिनट का पाठ
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मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर महीने के दौरान इंदौर पुलिस को साइबर धोखाधड़ी की लगभग 7,000 शिकायतें मिली हैं। इन सभी मामलों में लोगों को कुल 50 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। हालांकि, पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में इस राशि में से लगभग 7 करोड़ रुपये रिकवर करने में सफलता मिली है।
यह महत्वपूर्ण जानकारी गुरुवार को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश डंडोटिया द्वारा दी गई। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए लगातार नई और जटिल पद्धतियां अपना रहे हैं। वर्तमान में अपराधी डिजिटल अरेस्ट, APK फाइल और फर्जी निवेश योजनाओं का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, वे अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी सहारा ले रहे हैं ताकि धोखाधड़ी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
राजेश डंडोटिया के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर के बीच साइबर अपराधियों द्वारा हैक किए गए 350 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट्स को पुलिस रिकवर कर सकी है। इसके साथ ही, लोगों के नाम और फोटो का गलत इस्तेमाल कर बनाए गए 450 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक कराया गया है।
पुलिस अधिकारी ने विस्तार से बताया कि साइबर अपराधी अलग-अलग तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों को डराकर उनसे पैसे वसूले जाते हैं। कुछ मामलों में अपराधी APK फाइल भेजकर पीड़ित के मोबाइल फोन का पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर लेते हैं। इसके अलावा निवेश, गेमिंग या 'वर्क फ्रॉम होम' (घर बैठे काम) के बहाने लोगों को लालच देकर उनके साथ धोखाधड़ी की जाती है।
ठग लोग विश्वास जीतकर उनकी बैंकिंग विवरण और अन्य निजी जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। कई मामलों में मोबाइल फोन तक पहुंच बनाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। डंडोटिया ने चेतावनी दी कि साइबर अपराधी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से धोखाधड़ी के तरीकों को और अधिक आधुनिक बना रहे हैं। वे पीड़ितों के रिश्तेदारों या परिचितों की आवाज और चेहरे की नकल कर उन्हें ठगने का प्रयास कर रहे हैं।
इस तरह की धोखाधड़ी में किसी परिचित व्यक्ति की आवाज या वीडियो के जरिए मदद के नाम पर पैसे मांगे जा सकते हैं। इसलिए, अनजान नंबर से आने वाले ऐसे कॉल या वीडियो पर तुरंत विश्वास करने के बजाय, संबंधित व्यक्ति से उसके पुराने और ज्ञात नंबर पर संपर्क कर पुष्टि करना बहुत जरूरी है।
अब तक की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस के आंकड़े दर्शाते हैं कि इस वर्ष अक्टूबर तक इंदौर में साइबर धोखाधड़ी से हुए कुल 50 करोड़ रुपये के नुकसान के मुकाबले पुलिस केवल 7 करोड़ रुपये ही वापस करा सकी है। पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों की नई पद्धतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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