अध्यायों के पावन अवसर पर प्रत्येक नागरिक अपने घर में प्रज्वलित करे दीये: योगी आदित्यनाथ
अयोध्या में दसवें दीपोत्सव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री ने जनता से अपने आंगनों में दीये प्रज्वलित करने की अपील की।
लेखक कैपिटल क्रांति डेस्क, गांधीनगर · संपादक: पार्थ ठक्कर
7 नवंबर 2026, दोपहर 2:07 · अपडेट रात 11:01 · 3 मिनट का पाठ
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इंडिया टुडे के आलेख के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से अपील की है कि जब अयोध्या में राम जन्मभूमि पर दीये प्रज्वलित किए जाएं, तब सभी को अपने घरों और आंगनों में भी दीये प्रज्वलित करने चाहिए। अयोध्या अपने दसवें दीपोत्सव के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी है और इस त्योहार को श्रद्धा, सांस्कृतिक गौरव तथा सनातन चेतना के पुनरुत्थान का उत्सव बताया है।
शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर एक संदेश साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं दी थीं और दसवें दीपोत्सव की बधाई दी थी। उन्होंने बताया था कि जब श्री राम जन्मभूमि पर दीये प्रज्वलित किए जाएं, तब प्रत्येक नागरिक को अपने-अपने घरों और आंगनों में भी दीये प्रज्वलित करने चाहिए।
सरयू नदी के तट पर बसी यह पवित्र नगरी एक और भव्य उत्सव की साक्षी बनने के लिए तैयार हो रही है, जहाँ लाखों मिट्टी के दीये पूरी नगरी को प्रकाशित करने के लिए सुसज्जित हैं। मुख्यमंत्री ने अयोध्या के उत्सव के लिए सुसज्जित होने की बात बताते हुए इस त्योहार को खुशी, गौरव और भक्ति का संगम बताया था। उन्होंने कहा कि अवधपुरी का प्रत्येक कण आज आनंद से भरा हुआ है और भक्ति से धड़क रहा है, जो लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और पवित्र नगरी के आसपास की उत्सुकता को एकत्र करता है।
मुख्यमंत्री ने इस पावन अवसर पर अयोध्या पधारे उपराष्ट्रपति, राजदूतों, हाई कमिश्नरों, मित्र देशों के राजनयिकों, विशिष्ट मेहमानों और श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया था। उन्होंने बताया कि इन महानुभावों की उपस्थिति सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक एकता और 'वसुधैव कुटुंबकम्' के विचार को प्रकट करने वाले इस त्योहार को ऐतिहासिक और यादगार बनाएगी।
दीये के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे केवल मिट्टी के दीये से अधिक विशेष बताया और इसे जागरूकता तथा चेतना का प्रतीक बताया। उन्होंने अपने बयान में जोड़ा कि युगों से यह दीया हमें सिखाता आया है कि हमें अंधकार से लड़ने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि केवल एक ज्योति प्रज्वलित करनी है जिससे अंधकार अपने आप गायब हो जाता है।
अयोध्या के दीपोत्सव की यात्रा को याद करते हुए योगी आदित्यनाथ ने बताया कि इस पहल की शुरुआत वर्ष २०१७ में सरयू नदी के तट पर लिए गए संकल्प से हुई थी, जो समय के साथ भारत की सांस्कृतिक पहचान के एक बड़े उत्सव के रूप में विकसित हुआ है। यह दस वर्षों की लंबी यात्रा केवल नगरी को प्रकाशित करने या रिकॉर्ड बनाने से आगे बढ़ी है और सनातन संस्कृति के पुनरुत्थान तथा राष्ट्रीय स्व-गौरव की पुनर्स्थापना का हिस्सा बन गई है।
राम की पैड़ी पर प्रज्वलित होने वाले लाखों दीयों ने केवल अंधकार को ही नहीं भगाया है, बल्कि श्रद्धा, अंत्योदय और स्थानीय आत्मनिर्भरता का एक नया प्रकाश भी फैलाया है। दसवें दीपोत्सव को श्रद्धा, स्व-गौरव और सनातन चेतना के नवजागरण का उत्सव बताते हुए मुख्यमंत्री ने लोगों से भगवान राम के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया था। उन्होंने बताया था कि हमारा बड़ा लक्ष्य एक ऐसे रामराज्य की स्थापना करना होना चाहिए, जहाँ विकास के लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें और श्रद्धा, सामाजिक सद्भाव तथा सेवा के मूल्य सभी के जीवन को निरंतर प्रकाशित करते रहें।
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